नई दिल्ली - अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों के लिए इमिग्रेशन से जुड़ा खर्च बढ़ने वाला है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B और L-1 वीजा से जुड़े शुल्क के नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत कुछ पात्र नियोक्ताओं को कर्मचारी के वीजा की अवधि बढ़ाने के आवेदन पर भी अतिरिक्त शुल्क देना होगा। खास बात यह है कि कर्मचारी उसी कंपनी में काम करता रहे, तब भी निर्धारित परिस्थितियों में यह फीस लागू हो सकती है।
H-1B और L-1 पर कितनी फीस?
नए नियम के तहत पात्र कंपनियों को प्रत्येक H-1B आवेदन पर 4,000 अमेरिकी डॉलर और L-1 आवेदन पर 4,500 डॉलर का शुल्क देना होगा। यह राशि पहले से मौजूद फीस दरों के अनुरूप है, लेकिन अब इन शुल्कों का दायरा बढ़ने से अधिक आवेदन इसके दायरे में आ सकते हैं। नियम 9 सितंबर से लागू होने की बात कही गई है। इससे उन कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है, जो बड़ी संख्या में विदेशी तकनीकी विशेषज्ञों और पेशेवरों पर निर्भर हैं।
किन कंपनियों पर लागू होगा नियम?
यह बदलाव हर कंपनी पर समान रूप से लागू नहीं होगा। इसके लिए कुछ विशेष शर्तें निर्धारित की गई हैं। नियम मुख्य रूप से उन नियोक्ताओं को प्रभावित करेगा, जिनके पास अमेरिका में कम से कम 50 कर्मचारी हैं और जिनके कुल कर्मचारियों में 50 प्रतिशत से अधिक लोग H-1B, L-1A या L-1B स्टेटस पर हैं। ऐसी कंपनियों को पात्र कर्मचारी की इमिग्रेशन स्थिति बढ़ाने के लिए आवेदन करते समय संबंधित शुल्क का भुगतान करना होगा।
पहले क्या था नियम?
पहले '9/11 Response and Biometric Entry-Exit Fee' आमतौर पर शुरुआती रोजगार या नियोक्ता बदलने से संबंधित कुछ आवेदनों पर लागू होती थी। यदि कोई विदेशी कर्मचारी पहले से उसी कंपनी में काम कर रहा है और केवल उसके अधिकृत प्रवास की अवधि बढ़ाई जा रही है, तो कुछ परिस्थितियों में नियोक्ता को इस शुल्क से राहत मिलती थी।
अब DHS ने नियमों की अपनी कानूनी व्याख्या में बदलाव करते हुए इसके दायरे को विस्तृत किया है। इसका सीधा मतलब है कि पात्र नियोक्ताओं के लिए वीजा स्टेटस एक्सटेंशन के कुछ आवेदन भी शुल्क के दायरे में आ जाएंगे।
हर एक्सटेंशन आवेदन पर नहीं लगेगी फीस
संशोधित नियम में कुछ मामलों को छूट भी दी गई है। ऐसे आवेदन जिनमें कर्मचारी के अधिकृत इमिग्रेशन स्टेटस की अवधि बढ़ाने का अनुरोध ही नहीं किया गया है, उन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। यानी हर H-1B या L-1 से जुड़ी प्रक्रिया पर स्वतः यह अतिरिक्त राशि नहीं लगेगी।
विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर कंपनियों की बढ़ेगी चिंता
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनके कारोबार में विदेशी पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खासकर तकनीक, इंजीनियरिंग और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में बार-बार वीजा एक्सटेंशन की जरूरत पड़ने पर कंपनियों का इमिग्रेशन बजट बढ़ सकता है।
फीस भरने की जिम्मेदारी नियोक्ता की
DHS के अनुसार इस शुल्क का वित्तीय भार संबंधित नियोक्ता पर ही रहेगा। उन सुझावों को स्वीकार नहीं किया गया है, जिनमें विदेशी कर्मचारी को अपनी कंपनी की ओर से शुल्क नहीं देने की स्थिति में खुद भुगतान करने की अनुमति देने की बात कही गई थी। ऐसे में पात्र कंपनियों को अपने कर्मचारियों के संबंधित वीजा एक्सटेंशन आवेदनों के दौरान निर्धारित शुल्क का खर्च स्वयं उठाना होगा।