पश्चिम एशिया का रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। कंटेनर पोत पर हुए हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित कर सकता है। हालिया घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, तेल आयातक देशों और वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में कई ठिकानों को बनाया गया निशाना
अमेरिकी सेना ने व्यापक हवाई अभियान चलाते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, वायु रक्षा प्रणाली, रडार नेटवर्क, संचार केंद्र, गोला-बारूद भंडार और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की संभावित हमलावर क्षमता को सीमित करना है ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।
ईरान की जवाबी कार्रवाई से बढ़ी क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और ओमान की दिशा में मिसाइल तथा ड्रोन दागकर जवाबी कार्रवाई की। क्षेत्र के कई देशों में हवाई हमले की चेतावनी जारी करनी पड़ी और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर पहुंच गईं। जॉर्डन ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली के जरिए कई मिसाइलों को नष्ट करने का दावा किया, जबकि अन्य देशों ने भी एहतियाती सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए। इस घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका और गहरा दी है।
होर्मुज को लेकर दोनों देशों के दावों में टकराव
अमेरिका का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और किसी एक देश का उस पर नियंत्रण स्वीकार नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि जलडमरूमध्य उसके नियंत्रण क्षेत्र में आता है और विदेशी सैन्य हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ईरान ने समुद्री मार्ग बंद करने का दावा भी किया, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी फिलहाल जारी है। इन विरोधाभासी दावों ने वैश्विक व्यापारिक समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है।
संयुक्त राष्ट्र ने कूटनीतिक समाधान पर दिया जोर
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताते हुए दोनों देशों से संयम बरतने और सैन्य टकराव से बचने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसी बीच पाकिस्तान, कतर, मिस्र और ओमान जैसे देश कूटनीतिक स्तर पर दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल कराने और तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।