नई दिल्ली - पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इजरायल द्वारा लेबनान पर नए हमले किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, महंगाई और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर के निवेशक और ऊर्जा बाजार इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। अमेरिकी क्रूड ऑयल (WTI) 2.32 प्रतिशत बढ़कर 92.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 2.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 95.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि बाजार को तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका सताने लगी है।
युद्धविराम के बाद फिर भड़का संघर्ष
हाल ही में इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम हुआ था, जिससे उम्मीद की जा रही थी कि क्षेत्र में स्थिरता लौटेगी और तनाव कम होगा। हालांकि, इजरायल के नए हमलों के बाद हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है।
अमेरिका-ईरान संबंधों पर भी पड़ सकता है असर
विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की राह भी कठिन हो सकती है। यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ते हैं, तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। इससे निवेशकों की चिंता और गहराने की संभावना है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा बना रहता है, तो कई देशों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति महंगाई बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल-लेबनान संघर्ष लंबा खिंचता है, तो तेल बाजार में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा और कई देशों को ऊर्जा लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी हुई है।