फोन आज हमारी रोज की जरूरत बन चुका है और इसे पास रखना भी आम बात है। कुछ लोग फोन को पैंट की जेब में रखते हैं तो कई लोग शर्ट की जेब को सबसे आसान जगह मानते हैं। खासकर बाईं तरफ की जेब दिल के काफी पास होती है इसलिए कई लोगों को डर रहता है कि फोन की वाइब्रेशन या उससे निकलने वाले सिग्नल हार्टबीट को प्रभावित कर सकते हैं। यह चिंता आधुनिक जीवनशैली में काफी आम हो गई है। लोग अक्सर इस बारे में डॉक्टरों से सलाह लेते हैं। सही जानकारी के अभाव में अनावश्यक भय भी पैदा हो सकता है। वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इस मुद्दे को समझना जरूरी है।
क्या फोन से हार्टबीट बदल सकती है
फोन को दिल के पास रखने को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे हार्टबीट बदल सकती है। डॉक्टर के अनुसार आम तौर पर ऐसा होने का कोई पक्का सबूत नहीं है। फोन रेडियोफ्रीक्वेंसी सिग्नल का इस्तेमाल करके नेटवर्क से जुड़ता है। ये सिग्नल नॉन-आयनाइजिंग होते हैं यानी इनमें एक्स-रे जैसी आयनाइजिंग रेडिएशन की तरह डीएनए को सीधे नुकसान पहुंचाने वाली ऊर्जा नहीं होती। इसलिए सामान्य उपयोग में ये सिग्नल दिल की धड़कन को प्रभावित नहीं करते। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी इस तरह के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। सामान्य स्वस्थ लोगों के लिए यह चिंता ज्यादातर निराधार होती है।
वाइब्रेशन से हार्टबीट महसूस होने का कारण
कभी फोन जेब में वाइब्रेट करता है तो ऐसा लग सकता है कि दिल के पास कुछ हो रहा है। लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि हार्टबीट बदल गई है। डॉक्टर के अनुसार वाइब्रेशन की वजह से उस हिस्से की सेंसेशन ज्यादा महसूस हो सकती है। अगर आप पहले से अपनी हार्टबीट को लेकर चिंतित रहते हैं या शरीर में होने वाली छोटी-छोटी चीजों पर ज्यादा ध्यान देते हैं तो सामान्य धड़कन भी ज्यादा महसूस हो सकती है। यानी फोन की वाइब्रेशन और दिल की धड़कन को हर बार जोड़ना सही नहीं है। यह ज्यादातर मनोवैज्ञानिक प्रभाव होता है। ध्यान भटकाने वाली संवेदनाएं कभी-कभी भ्रम पैदा कर देती हैं।
किन लोगों को विशेष सावधानी चाहिए
यहां सबसे जरूरी बात उन लोगों के लिए है जिनके शरीर में पेसमेकर या कोई दूसरा इम्प्लांटेड हार्ट डिवाइस लगा है। कुछ फोन में मौजूद मजबूत मैग्नेट ऐसे डिवाइस के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन भी ऐसे लोगों को फोन को इम्प्लांट से कम से कम 6 इंच यानी करीब 15 सेंटीमीटर दूर रखने की सलाह देता है। साथ ही फोन को उस जगह की जेब में नहीं रखना चाहिए जहां हार्ट डिवाइस लगा हो। इन लोगों के लिए सामान्य नियमों से अलग सावधानी आवश्यक है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही व्यवहार करना चाहिए।
पेसमेकर वालों के लिए जरूरी उपाय
अगर किसी व्यक्ति को पेसमेकर या इम्प्लांटेबल कार्डियक डिफिब्रिलेटर लगा है तो फोन को सीधे उसके ऊपर वाली शर्ट या जैकेट की जेब में रखने से बचना चाहिए। फोन इस्तेमाल करते समय भी शरीर के उस हिस्से से थोड़ी दूरी रखना बेहतर है। सामान्य लोगों की तुलना में इन लोगों के लिए सावधानी का कारण फोन की रेडिएशन से ज्यादा कुछ डिवाइस में होने वाला मैग्नेटिक इंटरफेरेंस है। नियमित जांच और डॉक्टर से परामर्श लेकर ही फोन के उपयोग की आदतें तय करनी चाहिए। सही दूरी बनाए रखकर जोखिम को कम किया जा सकता है। जागरूकता से ही सुरक्षित उपयोग संभव है।