नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है, जिसके तहत आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) यूपीआई लेनदेनों पर नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाने वाला है। केंद्र सरकार और एनपीसीआई की नई व्यवस्था के मुताबिक, यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बल्कि संबंधित व्यापारियों से वसूला जाएगा, जिससे रोजमर्रा के छोटे लेन-देन पूरी तरह सुरक्षित और मुफ्त बने रहेंगे।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया एमडीआर नियम
केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के विशिष्ट बिजनेस यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर (MDR) लगाया जाएगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के बड़े लेनदेनों के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। हालांकि, आम नागरिकों के लिए व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई लेनदेन पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे।
छोटे और दैनिक लेन-देन रहेंगे पूरी तरह मुफ्त
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल यूपीआई लेनदेन का एक बड़ा हिस्सा छोटे भुगतानों का होता है। अगस्त के एनपीसीआई (NPCI) आंकड़ों के अनुसार, लगभग 86 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन 500 रुपये से कम के थे, जबकि 10 प्रतिशत ट्रांजैक्शन 501 से 2,000 रुपये के बीच के थे। इसका सीधा अर्थ यह है कि दैनिक बाजार, चाय-नाश्ता या छोटी-मोटी खरीदारी करने वाले आम ग्राहकों को इस नए बदलाव से कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
व्यापारियों पर शुल्क का प्रभाव और स्पष्ट निर्देश
नए नियम के तहत यदि कोई व्यापारी 10,000 रुपये का योग्य यूपीआई लेनदेन करता है, तो 0.4 प्रतिशत की दर से 40 रुपये एमडीआर बनेगा। हालांकि, केंद्र सरकार ने पेमेंट एग्रीगेटरों और बैंकों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि व्यापारी इस शुल्क को अलग से ग्राहकों के बिल में न जोड़ें। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यापारी ग्राहक से अलग से 'यूपीआई चार्ज' वसूलता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।
जीएसटी और इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रावधान
व्यापारियों के मन में एमडीआर पर लगने वाले टैक्स को लेकर सवाल थे, जिस पर स्पष्ट किया गया है कि यूपीआई लेनदेन की मूल राशि पर कोई अतिरिक्त जीएसटी नहीं लगेगा। हालांकि, एमडीआर राशि पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी देय होगा। यदि व्यापारी जीएसटी-पंजीकृत हैं, तो वे निश्चित शर्तों को पूरा करने के बाद इस कर का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें राहत मिलेगी।
डिजिटल भुगतान को दीर्घकालिक और सुदृढ़ बनाना उद्देश्य
सरकार का तर्क है कि यूपीआई प्रणाली को भविष्य में और अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाए रखने के लिए एक मजबूत राजस्व ढांचा आवश्यक है। हालांकि अभी तक यह पूरी तरह मुफ्त था, लेकिन इसके बुनियादी ढांचे और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। साथ ही, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय के पीछे किसी भी बाहरी अंतरराष्ट्रीय दबाव जैसी कोई बात नहीं है।