भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध तेज होता जा रहा है। शिक्षक संगठनों का दावा है कि प्रदेश के करीब 1.50 लाख शिक्षक इससे प्रभावित हो रहे हैं। अब शिक्षकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से तमिलनाडु की तर्ज पर विधानसभा में प्रस्ताव लाकर पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी राहत दिलाने की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि जिनकी नियुक्ति उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हुई थी, उन्हें वर्षों की सेवा के बाद नौकरी के बीच में दोबारा पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना चिंता का विषय है।
तमिलनाडु की तर्ज पर MP में प्रस्ताव की मांग
मध्यप्रदेश के शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि राज्य सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित करे और केंद्र सरकार से पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट देने की मांग रखे।शिक्षकों का तर्क है कि नियुक्ति के समय उन्होंने सभी निर्धारित योग्यता और नियमों को पूरा किया था। ऐसे में लंबे समय तक सेवा देने के बाद नई पात्रता शर्त लागू करना उनके लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।
तमिलनाडु में क्या हुआ?
शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष के मुताबिक, तमिलनाडु में विधानसभा के माध्यम से केंद्र सरकार से ऐसे शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग की गई है, जिनकी नियुक्ति 23 अगस्त 2010 से पहले राज्य के स्कूलों में लागू नियमों के आधार पर हुई थी।प्रस्ताव में लंबे समय से सेवा दे रहे और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों की नौकरी और आजीविका से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है।इसके अलावा केंद्र से शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23 में जरूरी संशोधन करने और NCTE के माध्यम से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी शिक्षकों की चिंता
TET को लेकर शिक्षकों की चिंता 1 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी। अदालत ने सेवा में बने रहने के लिए कई श्रेणियों के शिक्षकों के लिए TET से जुड़ी व्यवस्था तय की थी।जिन इन-सर्विस शिक्षकों के पास सेवानिवृत्ति के लिए पांच साल से ज्यादा समय था, उन्हें TET हासिल करने के लिए समय दिया गया था।इसके बाद 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर राहत देते हुए TET हासिल करने की समय-सीमा दो साल बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। अदालत ने राज्यों को TET नियमित रूप से आयोजित करने और संभव हो तो साल में दो बार परीक्षा कराने की बात भी कही थी।
पुराने शिक्षकों को स्थायी छूट देने की मांग
शिक्षक संगठनों का कहना है कि 2017 के बाद हुए बदलावों का असर ऐसे शिक्षकों पर भी पड़ा है, जो पहले से सरकारी सेवा में हैं और नियुक्ति के समय निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी कर चुके थे।शिक्षकों की मांग है कि केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट दे। साथ ही राज्यों को भी इसी आधार पर राहत देने की व्यवस्था की जाए।
30 अगस्त को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन
TET की अनिवार्यता का विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों ने 30 अगस्त 2026 को दिल्ली में प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।संगठनों के मुताबिक अलग-अलग राज्यों के TET विरोधी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाकर केंद्र सरकार के सामने अपनी मांग रखी जाएगी।शिक्षकों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी, आजीविका और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए वे केंद्र और राज्य सरकार से जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
MP सरकार से क्या चाहते हैं शिक्षक?
विधानसभा में TET से राहत का प्रस्ताव लाया जाए।
पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट मिले।
केंद्र सरकार अध्यादेश के जरिए राहत दे।
RTE Act की धारा 23 में आवश्यक संशोधन किया जाए।
NCTE की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।