मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। बोर्ड ने 13 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा से जुड़े नियम में एक बार के लिए छूट देने का निर्णय लिया है। यह राहत केवल शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लागू रहेगी। इस फैसले से उन विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी, जो निर्धारित आयु पूरी नहीं होने के कारण कक्षा 9वीं में प्रवेश या परीक्षा आवेदन से वंचित हो सकते थे।
क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
एमपी बोर्ड के सामने ऐसे कई मामलों की जानकारी आई, जिनमें विद्यार्थी शैक्षणिक रूप से कक्षा 9वीं में प्रवेश के पात्र थे, लेकिन न्यूनतम आयु पूरी नहीं होने के कारण उन्हें प्रवेश मिलने में कठिनाई हो रही थी। इसी स्थिति को देखते हुए बोर्ड ने विशेष प्रावधान के तहत इस सत्र के लिए आयु सीमा की अनिवार्यता को शिथिल करने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी योग्य छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अब किन छात्रों को मिलेगा लाभ?
एमपी बोर्ड के सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य द्वारा जारी आदेश के अनुसार-
जिन विद्यार्थियों की आयु 13 वर्ष से कम है, वे भी इस सत्र में कक्षा 9वीं में प्रवेश ले सकेंगे।
ऐसे छात्र परीक्षा आवेदन भरने के लिए भी पात्र होंगे।
यह छूट केवल 2026-27 शैक्षणिक सत्र तक सीमित रहेगी।
अगले सत्रों के लिए बोर्ड अलग से दिशा-निर्देश जारी करेगा।
पहले क्या था नियम?
इससे पहले 31 मार्च 2026 को जारी परीक्षा मार्गदर्शिका में स्पष्ट किया गया था कि कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए छात्र की न्यूनतम आयु 13 वर्ष होना अनिवार्य होगी। इस नियम के कारण कई विद्यार्थी प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हो सकते थे। अब बोर्ड ने एक बार के लिए इस शर्त में छूट देकर ऐसे छात्रों को राहत प्रदान की है।
स्कूलों को भी मिलेगी प्रशासनिक सुविधा
बोर्ड के इस फैसले का लाभ केवल विद्यार्थियों को ही नहीं बल्कि स्कूल प्रबंधन को भी मिलेगा। पहले आयु सीमा के कारण प्रवेश प्रक्रिया में कई तरह की प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब पात्र विद्यार्थियों का प्रवेश और परीक्षा आवेदन बिना आयु संबंधी बाधा के पूरा किया जा सकेगा, जिससे स्कूलों की प्रक्रिया भी आसान होगी।
शिक्षा विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन विद्यार्थियों के हित में है जिनकी पढ़ाई केवल कुछ महीनों की आयु कमी के कारण प्रभावित हो सकती थी। इससे छात्रों की शैक्षणिक निरंतरता बनी रहेगी और उन्हें एक वर्ष का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भविष्य में इस संबंध में स्थायी नीति बनाए जाने से अभिभावकों और स्कूलों में भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी।
छात्रों और अभिभावकों को क्या करना चाहिए?
यदि किसी छात्र की आयु 13 वर्ष से कम है और वह कक्षा 9वीं में प्रवेश लेना चाहता है, तो अभिभावकों को संबंधित स्कूल से संपर्क कर बोर्ड के नए आदेश के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। साथ ही सभी आवश्यक दस्तावेज और जन्मतिथि संबंधी प्रमाणपत्र स्कूल में जमा करना जरूरी होगा।