मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है और तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। छतरपुर सहित बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल अंचल के कई जिलों में सूरज की तीखी किरणों ने लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को प्रदेश में इस सीजन का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने गर्मी की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा और बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में कम भीड़ देखने को मिल रही है।
मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट
छतरपुर में मौसम विभाग के सहायक वैज्ञानिक शिवम श्रीवास्तव के अनुसार भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने 22 मई तक रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग का अनुमान है कि प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रह सकता है। रेड अलर्ट का अर्थ है कि मौसम की स्थिति स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकती है और लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। प्रशासन को भी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
लू के थपेड़ों से बढ़ा स्वास्थ्य संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भीषण गर्मी में लू लगने, शरीर में पानी की कमी, चक्कर आने और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और खुले में काम करने वाले श्रमिक सबसे अधिक जोखिम वाले वर्ग में शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्का भोजन करने और अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।
रातों का तापमान भी बढ़ा रहा परेशानी
गर्मी का असर केवल दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि रात के समय भी तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल रही। गर्म रातों के कारण शरीर को दिनभर की तपिश से उबरने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता, जिससे थकान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञ इसे ‘वार्म नाइट’ की स्थिति बताते हैं, जो लंबे समय तक बनी रहे तो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
मौसम की इस स्थिति के पीछे क्या हैं कारण?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में ऊपरी वायुमंडल में बने उच्च दबाव क्षेत्र और शुष्क गर्म हवाओं के प्रभाव के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। आसमान साफ होने से सूर्य की किरणें सीधे धरती को गर्म कर रही हैं। साथ ही हवा में नमी की कमी के कारण गर्मी का प्रभाव और अधिक महसूस हो रहा है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में लू की तीव्रता लगातार बनी हुई है और निकट भविष्य में तत्काल राहत मिलने के संकेत भी कम दिखाई दे रहे हैं।
सतर्कता ही बचाव का सबसे प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना, नियमित रूप से पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना, सूती और हल्के रंग के वस्त्र पहनना तथा शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति को अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, तेज सिरदर्द या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। मौसम विभाग ने भी नागरिकों से आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की अपील की है।