इबोला वायरस रोग (EVD) को लेकर देश में तैयारियों और प्रतिक्रिया उपायों की समीक्षा के लिए बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में देशभर में स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
भारत में अब तक कोई मामला नहीं
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अब तक इबोला वायरस रोग का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किए जाने के बाद एहतियात के तौर पर देश में निगरानी बढ़ा दी गई है।
राज्यों को दिए गए सख्त दिशा-निर्देश
बैठक के दौरान सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी तैयारियों को पूरी तरह मजबूत रखें। इसमें शामिल हैं—
- आगमन-पूर्व और आगमन-पश्चात जांच व्यवस्था
- पृथकवास (Isolation) सुविधाएं
- रोगी प्रबंधन और रेफरल सिस्टम
- प्रयोगशाला जांच की क्षमता
- इन सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को पहले ही राज्यों के साथ साझा किया जा चुका है।
निगरानी और रिपोर्टिंग पर जोर
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने समन्वित निगरानी, समय पर रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और वे स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
2014 के अनुभव का हवाला
मंत्रालय ने कहा कि भारत को ऐसे संक्रमणों से निपटने का अनुभव है। वर्ष 2014 में अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप के दौरान भारत ने प्रभावी एहतियाती कदम उठाए थे, जिनका सकारात्मक परिणाम मिला था।
सरकार की अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए और किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए।