प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है या फिर ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे मुद्दों पर नई घोषणा हो सकती है।
यह इस वर्ष मंत्रिपरिषद की पहली बैठक है, इसलिए इसे काफी अहम माना जा रहा है। खासतौर पर देश में ईंधन और बिजली आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं।
एक सप्ताह में दो बार बढ़ चुके हैं दाम
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में दो बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। पहले 15 मई को प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 19 मई को फिर 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए।वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इस सप्ताह ईंधन करीब 3.90 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
क्या अभी और बढ़ सकती हैं कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ रही कीमतों से तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को कुछ राहत जरूर मिलेगी, क्योंकि वे लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है।मार्च में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई थीं और इसके बाद से अधिकांश समय कीमतें इसी स्तर के आसपास बनी हुई हैं।