सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का संचालन मध्यप्रदेश में अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य कैबिनेट ने 11,608.47 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह योजना प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है जहां योजना के क्रियान्वयन, फसल स्थिति के आकलन और उपज निर्धारण में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को समय पर राहत पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रही है।
लाखों किसानों को मिला फसल नुकसान का मुआवजा
मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2023-24 में 35.18 लाख किसानों के आवेदनों पर 961.68 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया। वहीं वर्ष 2024-25 में 35.56 लाख कृषक आवेदनों पर 275.86 करोड़ रुपये किसानों के खातों में जारी किए गए। उन्होंने कहा कि योजना में शामिल किसानों को फसल नुकसान या प्राकृतिक आपदा से क्षति होने पर वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलती है।
किसानों के लिए कम रखा गया प्रीमियम
डॉ. मोहन यादव ने बताया कि योजना में किसानों पर प्रीमियम का बोझ बेहद कम रखा गया है। खरीफ फसलों के लिए किसानों को बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत और रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। वहीं वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए यह दर 5 प्रतिशत तय की गई है। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में सभी फसलों के लिए क्षतिपूर्ति का स्तर 80 प्रतिशत रखा गया है। साथ ही 110 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्लेम राशि का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
11 क्लस्टर्स में लागू है योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का संचालन प्रदेश के जिलों में 11 क्लस्टर्स के माध्यम से किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा किसानों को योजना से जोड़कर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह योजना सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।