भोपाल। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) में एलएलएम की नियमित पढ़ाई के दौरान करीब 10 महीने तक विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन और भत्ते स्वेच्छा से नहीं लेने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सहित प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को पत्र भेजकर वेतन-भत्तों का भुगतान स्थगित करने का अनुरोध किया है।
एलएलएम की पढ़ाई के लिए लिया स्वैच्छिक निर्णय
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने बताया कि उनका चयन भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में एक वर्षीय एलएलएम (पोस्ट ग्रेजुएट) कोर्स के लिए हुआ है। वे 20 जुलाई 2026 से नियमित अध्ययन और शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल रहेंगे। इसी कारण उन्होंने विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन एवं भत्ते स्वेच्छा से नहीं लेने का निर्णय लिया है।
विधानसभा अध्यक्ष सहित कई मंत्रियों को भेजा पत्र
डोडियार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, संसदीय कार्य मंत्री, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, जनजातीय कार्य मंत्री, मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव तथा विधानसभा के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि 20 जुलाई 2026 से 15 मई 2027 तक उन्हें मिलने वाले विधायक वेतन एवं भत्तों का भुगतान स्थगित किया जाए। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह निर्णय उन्होंने बिना किसी दबाव के पूरी तरह स्वेच्छा से लिया है। भविष्य में आवश्यकता होने पर वे अलग से आवेदन देकर वेतन एवं भत्ते पुनः प्राप्त करने का अनुरोध करेंगे।
पढ़ाई के साथ निभाएंगे विधायक की जिम्मेदारियां
कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी के उपस्थिति एवं अध्ययन संबंधी सभी नियमों का पालन करेंगे। साथ ही विधानसभा सत्रों में प्राथमिकता से उपस्थित रहकर जनता के हितों से जुड़े मुद्दे उठाएंगे और विधायक के संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा क्षेत्र में सरकारी कार्यक्रमों में भागीदारी, जनसुनवाई और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए शासन-प्रशासन से नियमित संपर्क बनाए रखने का प्रयास जारी रहेगा।
अपने खर्च पर करेंगे क्षेत्र का दौरा
विधायक डोडियार ने बताया कि करीब 10 महीने तक वेतन और भत्ते नहीं लेने के बावजूद वे अपने निजी खर्च पर विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे। जनसुनवाई, लोगों से मुलाकात और विकास कार्यों की निगरानी जैसे कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल होकर जनता से जुड़ाव बनाए रखेंगे।
यह फैसला क्यों है खास?
जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वेच्छा से वेतन और भत्ते छोड़ने के मामले कम ही देखने को मिलते हैं। ऐसे में कमलेश्वर डोडियार का यह निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शिक्षा और जनसेवा के बीच संतुलन बनाते हुए दोनों जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।