शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। ई-अटेंडेंस दर्ज करने में लापरवाही बरतने वाले 643 सरकारी शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तलब किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी दीपा कीर ने 12 अगस्त को इस संबंध में आदेश जारी कर संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद ही जिला शिक्षा कार्यालय में उपस्थित हों। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ई-अटेंडेंस व्यवस्था में सामने आ रही अनियमितताओं की वास्तविक वजह पता करना है।
549 शिक्षकों ने 10:30 बजे के बाद लगाई अटेंडेंस
जारी आदेश के अनुसार, जिले में 549 शिक्षक ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने सुबह 10:30 बजे के बाद 'हमारे शिक्षक ऐप' पर अपनी ई-अटेंडेंस दर्ज की। इसके अलावा 94 शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज ही नहीं की। विभाग ने इन सभी शिक्षकों को जिला शिक्षा कार्यालय में उपस्थित होकर देरी से अटेंडेंस लगाने या अटेंडेंस दर्ज नहीं करने का कारण बताने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग ने अलग-अलग विकासखंडों से आने वाले शिक्षकों के लिए जिला कार्यालय पहुंचने का समय भी निर्धारित किया है, ताकि सभी संबंधित शिक्षकों से क्रमवार तरीके से जानकारी ली जा सके।
10:30 बजे से 4:30 बजे तक है स्कूल का समय
जिला शिक्षा अधिकारी दीपा कीर के मुताबिक जिले के सरकारी स्कूलों में निर्धारित शिक्षण समय सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक है। पिछले कुछ दिनों से विभाग को ऐसी जानकारी मिल रही थी कि कुछ शिक्षक निर्धारित समय के बाद ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं। कुछ शिक्षकों की ओर से उपस्थिति दर्ज नहीं किए जाने की जानकारी भी सामने आई। इसी के बाद विभाग ने ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड की जांच की और नियमों के मुताबिक लापरवाही करने वाले शिक्षकों को स्पष्टीकरण के लिए कार्यालय बुलाने का फैसला लिया।
शिक्षकों से पूछा जाएगा देरी का वास्तविक कारण
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिक्षकों से यह पूछा जाएगा कि उन्होंने निर्धारित समय पर ई-अटेंडेंस क्यों दर्ज नहीं की। विभाग यह भी पता करेगा कि देरी के पीछे कोई वास्तविक या तकनीकी समस्या थी या फिर लापरवाही के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं की गई।
अधिकारी के मुताबिक यदि किसी शिक्षक के पास उपस्थिति दर्ज नहीं करने या देरी से दर्ज करने का कोई वास्तविक कारण है, तो उसकी जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को भेजी जाएगी। इसके आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ई-अटेंडेंस पोर्टल पर मिले मृत और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम
जांच के दौरान ई-अटेंडेंस पोर्टल पर कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं, जिनमें कुछ शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कुछ की मृत्यु हो चुकी है। शिक्षा विभाग अब ऐसे मामलों की जानकारी सहायक शिक्षा अधिकारी (AEO) के माध्यम से वरिष्ठ कार्यालय को भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद संबंधित नामों को ई-अटेंडेंस पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया की जाएगी। इससे ई-अटेंडेंस पोर्टल पर उपलब्ध कर्मचारियों के रिकॉर्ड को अपडेट करने में भी मदद मिलेगी।
एक दिन में 643 शिक्षकों को बुलाने पर उठे सवाल
एक ही दिन में 643 शिक्षकों को जिला मुख्यालय बुलाए जाने के बाद इससे जुड़े दूसरे सवाल भी सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में शिक्षकों के एक साथ जिला शिक्षा कार्यालय पहुंचने से संबंधित स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं, कुछ शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने या देरी से दर्ज होने के पीछे अपने कारण भी विभाग के सामने रखे हैं। अब शिक्षा विभाग इन कारणों की जांच कर यह तय करेगा कि किन मामलों में वास्तविक समस्या थी और किन मामलों में लापरवाही हुई।
विभाग की सख्ती का क्या है उद्देश्य?
ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना और उपस्थिति की निगरानी को अधिक पारदर्शी बनाना है। ऐसे में निर्धारित समय के बाद अटेंडेंस दर्ज करने या अटेंडेंस नहीं लगाने के मामलों को विभाग गंभीरता से ले रहा है। शाजापुर में 643 शिक्षकों को तलब किए जाने की कार्रवाई से साफ है कि शिक्षा विभाग ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड की निगरानी कर रहा है और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित शिक्षकों से जवाब मांगा जा रहा है। अब शिक्षकों के स्पष्टीकरण और विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।