नई दिल्ली। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 1947 के विभाजन के दौरान पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों से निकलकर अपने जीवन को फिर से खड़ा किया और देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले और विस्थापन का दर्द झेलने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का वह दौर था, जिसने असंख्य जिंदगियों को प्रभावित किया, परिवारों को उजाड़ दिया और लोगों को अपनों से अलग कर दिया।
‘विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस को याद करने का दिन’
पीएम मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन लोगों के साहस और संघर्ष को याद करने का अवसर है, जिन्होंने उस भयावह दौर का सामना किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान कई परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया और बड़ी पीड़ा झेली। इसके बावजूद प्रभावित लोगों ने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों ने कठिनाइयों से उबरते हुए शून्य से अपनी जिंदगी दोबारा शुरू की और चुनौतियों को सफलता में बदला।
‘देश की प्रगति में दिया अमूल्य योगदान’
प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन की त्रासदी से उबरने वाले लोगों ने अपने साहस और सामर्थ्य के बल पर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों की जीवन यात्रा मानव साहस और जज्बे की ताकत को दर्शाती है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने जीवन को दोबारा बनाया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया। पीएम मोदी ने ऐसे सभी लोगों को नमन करते हुए कहा कि उनकी संघर्ष गाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
‘सद्भाव और भाईचारे का संकल्प मजबूत करें’
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देशवासियों से आपसी सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह दिवस देश में सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द के संकल्प को और मजबूत करने वाला बने। उन्होंने देशवासियों से मिलकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन के कठिन दौर से निकलकर देश की प्रगति में योगदान देने वाले सभी देशवासियों को वह हृदय से नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अपने साहस और सामर्थ्य से यह साबित किया कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प के जरिए लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। उन्होंने लिखा—
“उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति।”
इसका भावार्थ बताते हुए कहा गया है कि परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ के माध्यम से विभिन्न कलाओं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार का विकास होता है तथा सफलता का रास्ता तैयार होता है। संदेश का मूल भाव यह है कि व्यक्ति को केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
‘पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता’
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सुभाषित का संदेश पुरुषार्थ और निरंतर प्रयास पर केंद्रित रहा। इसमें कहा गया है कि मेहनत और कर्मठता के जरिए ही व्यक्ति अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकता है और सफलता हासिल कर सकता है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पीएम मोदी का संदेश एक ओर विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लोगों के संघर्ष और साहस को याद करता है, वहीं दूसरी ओर देशवासियों से एकता, सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने की अपील करता है।