पीएम मोदी आज देश को नया संसद भवन समर्पित करेंगे। आपको बताते हैं कि नए और पुराने भवन में अंतर
नई संसद की खासियतें
नए संसद भवन की आधारशिला पीएम मोदी ने 10 दिसंबर, 2020 को रखी थी। नए भवन को गुजरात की कंपनी एचसीपी की ओर से डिजाइन किया है।. इसमें लोकसभा कक्ष में 888 सदस्य और राज्यसभा कक्ष में 384 सदस्य के बैठने की क्षमता है, संयुक्त सत्र के लिए लोकसभा हॉल में 1,272 सदस्य बैठ सकते हैं. टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से निर्मित नए भवन में एक भव्य संविधान हॉल, संसद सदस्यों के लिए एक लाउंज, एक लाइब्रेरी, कैफे, डाइनिंग एरिया, कमेटी मीटिंग के कमरे, बड़े पार्किंग एरिया के साथ-साथ वाआईपी लाउंज की भी व्यवस्था की गई है।
त्रिभुजाकार वाले चार मंजिला संसद भवन का निर्मित क्षेत्र 64,500 वर्ग मीटर है. भवन के तीन मुख्य द्वार हैं- ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार. इसमें वीआईपी, सांसदों और आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार हैं। नया संसद भवन दिव्यांगों के अनुकूल होगा और मंत्रिपरिषद के इस्तेमाल के लिए करीब 92 कमरे होंगे। नए संसद भवन के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई है।
नई और पुरानी संसद में अंतर
संसद के पुराने भवन का निर्माण 6 साल में पूरा हुआ था। जबकि नया भवन 3 साल से भी कम समय में तैयार कर दिया गया। पुरानी पार्लियामेंट को बनाने में 83 लाख रुपये खर्च हुए। जबकि नए भवन के निर्माण में 1200 करोड़ से ज्यादा की लागत आई। पुरानी इमारत की शेप गोलाकार है. जबकि नई बिल्डिंग त्रिकोणीय शेप में है। नए भवन का क्षेत्रफल 64,500 स्क्वैयर मीटर है. जबकि पुराना भवन 566 मीटर व्यास में बना था. पुराने भवन में लोकसभा में 550 और राज्यसभा में 250 सदस्य बैठ सकते हैं. जबकि नई संसद में लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की क्षमता है।.
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