New Delhi: देशभर में आज महावीर जंयती (Mahavir Jayanti 2023) का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन जैन धर्म के अनुयायी भगवान महावीर के 5 अनमोल सिद्धांत पर चलने का प्रण लेते हैं। जानें महावीर जी के 5 सिद्धांत कौन से है, जिसमें सफलता का राज छिपा है।
पीएम मोदी ने ट्वीट कर दी बधाई
प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट कर देशवासियों को महावीर जयंती की शुभकामना दी, उन्होंने लिखा- 'आज एक विशेष दिन है, जब हम भगवान महावीर की महान शिक्षाओं को याद करते हैं। उन्होंने एक शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और समृद्ध समाज के निर्माण का मार्ग दिखाया। उनसे प्रेरित होकर, हम हमेशा दूसरों की सेवा करें और गरीबों और दलितों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।'
महावीर जी के 5 सिद्धांत
बता दें कि भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर है। इन्होंने (Mahavir Jayanti 2023) मानव कल्याण और जीवन में सफलता पाने के लिए उन पांच सिद्धांत बताए हैं, इन्हें पंचशील सिद्धांत कहा जाता है। महावीर स्वामी का मानना था कि इन 5 सिद्धांतों को जिसने अपना लिया, उसे हर कदम पर सफलता मिलेगी और अंत में मोक्ष प्राप्त होगा।
सत्य - भगवान महावीर का ये सिद्धांत हमें सही राह पर जानें की सीख देता है. जिस राह में सत्य की नींव डली हो वहां कुछ अवरोध जरुर आते हैं लेकिन सत्यता का हाथ थामे रखा तो पथरीला रास्ता भी पार हो जाएगा। अंत में जीत आपकी ही होगी. सत्य ही सच्चा तत्व है।
अहिंसा - जैन धर्म में अहिंसा एक मूलभूत सिद्धांत हैं, महावीर स्वामी के अनुसार ‘अहिंसा परमो धर्म’ है। वह कहते हैं कि इस लोक में जितने भी मनुष्य, जीव, हैं उनकी हिंसा न करो। उन्हें शारीरिक तौर पर कष्ट न पहुंचाए, न ही किसी के बारे में बुरा सोचें। अहिंसा को अपनाने वाले हर जगह सफल होते हैं।
अपरिग्रह - अपरिग्रह यानी किसी वस्तु या जीव से अधिक लगाव। महावीर स्वामी जी का ये सिद्धांत बताता है कि सजीव या निर्जीव चीजों की आसक्ति मनुष्य के दुख का सबसे बड़ा कारण है। भगवान महावीर कहते हैं कि वस्तुओं की उपलब्धता या उनके न होने पर दोनों ही स्थितियों में समान भाव रखना चाहिए। वस्तुओं और मनुष्यों से अधिक लगाव व्यक्ति को लक्ष्य से भटकाता है।
अचौर्य (अस्तेय) - इसका अर्थ है दूसरों की वस्तुओं को बिना उनकी अनुमति के ग्रहण करना (चोरी करना)यहां चोरी का अर्थ सिर्फ भौतिक वस्तुओं की चोरी ही नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति खराब सोच (नीयत) से भी है। कभी ‘मैं’ का भाव न रखें. ‘हम’ की भावना रखने वाला व्यक्ति ऊंचाईयों को छूता है और ईश्वर भी ऐसे लोगों की मदद करते हैं।
ब्रह्मचर्य - महावीर स्वामी जी के इस सिद्धांत का अर्थ अविवाहित रहना नहीं है। इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति को अपने अंदर छिप ब्रह्म को पहचानना चाहिए। इसके लिए उसे स्वंय को समय देना जरुरी है। वे कहते थे कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है।
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