नई दिल्ली - जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल स्थानांतरित किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार को बल प्रयोग करने के बजाय वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी।
केजरीवाल बोले- आंदोलन नहीं, शिक्षा व्यवस्था सुधारिए
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सरकार को आंदोलन को दबाने के बजाय देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, इतना अहंकार ठीक नहीं है। उन्हें जबरन उठाने के बजाय मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी।" केजरीवाल ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कुचलने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मनीष सिसोदिया ने केंद्र पर साधा निशाना
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर कोई पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे दबाने की कोशिश की जा रही है। सिसोदिया ने कहा कि यह राजनीति नहीं बल्कि कायरता है और लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए।
संजय सिंह का आरोप- 21 दिन तक नहीं हुई कोई बातचीत
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक से केंद्र सरकार के किसी प्रतिनिधि ने बातचीत तक नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से पहले आंदोलन को कमजोर करने के लिए वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजा गया। साथ ही उन्होंने युवाओं और छात्रों से आंदोलन का समर्थन जारी रखने की अपील की।
सौरभ भारद्वाज ने लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और कार्रवाई के दौरान कैमरों पर सफेद चादरें डाल दी गईं ताकि कथित पुलिस कार्रवाई का वीडियो रिकॉर्ड न हो सके। वहीं, पार्टी विधायक संजय झा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि जनआंदोलनों को दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
दिल्ली पुलिस ने दी कार्रवाई की सफाई
दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में सोनम वांगचुक को आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, यह कदम केवल उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उठाया गया और पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की गई।

मामला बना राजनीतिक मुद्दा
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और उन्हें अस्पताल भेजे जाने का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय केवल स्वास्थ्य और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लिया गया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।