चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संवैधानिक समयसीमा के भीतर ही कराए जाएंगे। आयोग ने कहा कि जनगणना का कार्यक्रम चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं बनेगा और आवश्यकता पड़ने पर जनगणना के कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में तय समय पर होंगे चुनाव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष निर्धारित समय पर ही होंगे। इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च से मई 2027 के बीच समाप्त हो रहा है और उससे पहले चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। विधानसभा के कार्यकाल के अनुसार उत्तर प्रदेश विधानसभा 22 मई, उत्तराखंड 28 मार्च, पंजाब 16 मार्च, गोवा 14 मार्च और मणिपुर 13 मार्च तक प्रभावी रहेगी।
जनगणना चुनाव में नहीं बनेगी रुकावट
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा अगले वर्ष 1 से 28 फरवरी के बीच जनगणना के तीसरे चरण का कार्यक्रम घोषित किए जाने के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकते हैं या समय से पहले कराए जा सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव संवैधानिक दायित्व हैं, जबकि जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है। ऐसे में संवैधानिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि यदि दोनों कार्यक्रमों में टकराव की स्थिति बनती है तो आवश्यकता अनुसार जनगणना के कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन चुनाव समय पर ही होंगे।
मीडिया सम्मेलन में आयोग ने दिया स्पष्ट संदेश
नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) में आयोजित पहली अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन-2026 के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह जानकारी दी। सम्मेलन में देशभर से 380 से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची और चुनाव प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी साझा की।
फरवरी-मार्च में ही होते रहे हैं यूपी विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश में पिछले दो विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड देखें तो चुनाव हमेशा फरवरी-मार्च के दौरान ही कराए गए हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में मतदान फरवरी और मार्च में हुआ था, जबकि परिणाम 11 मार्च को घोषित किए गए थे। वहीं 2022 विधानसभा चुनाव की अधिसूचना 8 जनवरी को जारी हुई थी और 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच सात चरणों में मतदान हुआ था। इसके परिणाम 10 मार्च को घोषित किए गए थे। इसी परंपरा को देखते हुए माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव की अधिसूचना भी जनवरी में जारी हो सकती है और मतदान फरवरी-मार्च के दौरान कराया जाएगा।
31 दिसंबर तक विकास कार्यों पर सरकार का फोकस
चुनावी अधिसूचना जारी होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश सरकार वर्ष के अंत तक अधिक से अधिक विकास कार्यों को पूरा करने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि चुनाव से पहले योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाया जा सके।
95 करोड़ मतदाताओं की सूची है 'जीवंत दस्तावेज'
चुनाव आयोग ने बताया कि देश की करीब 95 करोड़ मतदाताओं वाली मतदाता सूची एक "जीवंत दस्तावेज" है, जिसे लगातार अपडेट किया जाता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार देशभर में 12 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और 15 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) मतदाता सूची के अद्यतन और सत्यापन का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में चुनाव संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ कराए जाते हैं।