नए साल के मौके पर निर्वासित बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक ओपन लेटर लिखा। इसमें उन्होंने बलूचिस्तान के छह करोड़ नागरिकों की ओर से भारत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों से मुक्ति के लिए भारत का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि बलूचिस्तान का हर नागरिक न्याय और स्वतंत्रता की लड़ाई में भारत के साथ खड़ा है।
साझा इतिहास और आध्यात्मिक जुड़ाव का उल्लेख
पत्र में बलोच नेता ने भारत और बलूचिस्तान के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया। हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थल को उन्होंने साझा आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया। उनके अनुसार यह संबंध केवल कूटनीति नहीं, बल्कि सभ्यतागत जुड़ाव का परिणाम है, जिसे और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
पाकिस्तान के दमन और चीन–पाक गठजोड़ पर गंभीर चिंता
मीर यार बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान के लोग बीते 69 वर्षों से लगातार अत्याचार, सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक दमन झेल रहे हैं। साथ ही उन्होंने चीन–पाकिस्तान के बढ़ते सामरिक गठजोड़ पर भी चेतावनी दी। उनका दावा है कि यदि स्थिति नहीं बदली तो चीन भविष्य में बलूचिस्तान में सैनिक तैनात कर सकता है — जो भारत और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
भारत की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना
बलोच नेता ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रशंसा की। उन्होंने मोदी सरकार की दृढ़ और निर्णायक नीतियों को दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान को भी सशक्त बनाता है।
स्वतंत्रता और रणनीतिक स्थिरता की अपील
पत्र के अंत में उन्होंने भारत से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के संघर्ष में उसका समर्थन करने की अपील की। उनका कहना है कि यह कदम न केवल मानवाधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि क्षेत्रीय शांति, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक संतुलन के लिए भी अहम साबित होगा।
Comments (0)