वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद ने कहा कि, कोरोना काल में घोषित आत्मनिर्भर भारत योजना का ही नतीजा है कि आज देश किसी भी अनिश्चित चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से अर्थव्यवस्था पर होने वाले असर को लेकर मंगलवार को संसद में उठाए गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि, घरेलू स्तर पर इस संकट से देश को कोई गंभीर खतरा नहीं है।
देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है
संसद में बोलते हुए वित्त मंत्री ने आगे कहा कि, सरकार ने अप्रैल से शुरू हो रहे अगले वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत खर्च के लिए 12.20 लाख करोड़ का प्रविधान किया है जिससे विकास गति कायम रखने में मदद मिलेगी। ऊर्जा संकट को लेकर उठाए गए सवाल के जवाब में निर्मला सीतारमण ने कहा कि, देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं और हमारे पास पर्याप्त ऊर्जा है। इसके साथ ही आगे उन्होंने कहा कि, वर्ष 2014 के मुकाबले देश में बिजली का उत्पादन दोगुना हो चुका है। अभी देश की बिजली उत्पादन क्षमता 5.25 लाख मेगावाट से अधिक हो चुकी है।
LPG का उत्पादन घरेलू स्तर पर बढ़ाया जा रहा है
उन्होंने आगे कहा कि, LPG का उत्पादन भी घरेलू स्तर पर बढ़ाया जा रहा है और अब तक उत्पादन में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है। जरूरत का 65 प्रतिशत LPG हम आयात करते हैं इनमें से 95 प्रतिशत LPG होमुर्ज के रास्ते से आयात किया जाता है। वित्त मंत्री ने इस दौरान आगे कहा कि, LPG के लिए घरेलू उपभोक्ता को प्राथमिकता दी जा रही है और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है।
आर्थिक स्थिरता फंड का गठन किया
एक लाख करोड़ के आर्थिक स्थिरता फंड के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि, यह एक प्रकार का वित्तीय भंडार (बफर) का काम करेगा और आपात स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। आपको याद दिला दें कि, पिछले सप्ताह उन्होंने संसद को बताया था कि, सरकार ने पश्चिम एशिया में युद्ध से उत्पन्न संकट को देखते हुए एक लाख करोड़ के आर्थिक स्थिरता फंड का गठन किया है।
यूपीए सरकार ने जो कर्ज लिया उसे बजट में नहीं दिखाया
राजकोषीय घाटे पर उठाए गए सवाल के जवाब में भारतीय जनता पार्टी की सीनियर नेत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि, यूपीए के काल में ऑयल बांड के नाम पर जो कर्ज लिए गए, उन्हें बजट में नहीं दिखाया गया। उन्होंने सदन को बताया कि ऑयल बांड के नाम पर जो कर्ज लिए गए और उन पर लगने वाले ब्याज की पूर्ति के लिए एनडीए की सरकार ने 2.92 लाख करोड़ चुकाए हैं।
NDA सरकार ने बैंकों की हालत दुरुस्त की
इसके साथ ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि, यूपीए के काल में बैंकों की वित्तीय हालत खराब कर दी गई और बैंकों की हालत दुरुस्त करने के लिए एनडीए की सरकार ने 2.8 लाख करोड़ रुपए लगाए। इन सभी रकम को जोड़ दिया जाए तो यूपीए के काल में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 7.9 प्रतिशत होता।
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