कोलकाता: उत्तर बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां भाजपा सरकार ने बड़ा कैबिनेट विस्तार करते हुए नौ विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
अलीपुरद्वार बना सबसे बड़ा विजेता जिला
इस कैबिनेट विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा अलीपुरद्वार जिले की हो रही है, जहां से तीन विधायकों को मंत्री बनाया गया है। पांच विधायकों वाले इस जिले में से तीन को मंत्रिमंडल में जगह मिलना स्थानीय राजनीति के लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अलीपुरद्वार से तीन मंत्री शामिल
फालाकाटा के विधायक दीपक बर्मन और कुमारग्राम के मनोज ओरांव को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि कालचीनी के विशाल लामा को राज्य मंत्री (MoS) की जिम्मेदारी दी गई है। इससे जिले में भाजपा का प्रभाव और मजबूत होता दिख रहा है।
दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर और कूचबिहार में भी प्रतिनिधित्व
दार्जिलिंग जिले से सिलीगुड़ी के शंकर घोष को कैबिनेट मंत्री और माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी के आनंदमय बर्मन को राज्य मंत्री बनाया गया है। उत्तर दिनाजपुर से बिराज विश्वास और कौशिक चौधरी को राज्य मंत्री पद मिला है। वहीं कूचबिहार से निसिथ प्रमाणिक को कैबिनेट मंत्री और मालती रावा रॉय को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।
मालदा से भी मिला प्रतिनिधित्व
मालदा जिले के हबीबपुर से विधायक जोएल मुर्मू को राज्य मंत्री बनाया गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी ने उत्तर बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
शंकर घोष का बयान
सिलीगुड़ी विधायक शंकर घोष ने मंत्री पद मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनके लिए एक नई जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वे विकास, बंगाल और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए पूरी मेहनत से काम करेंगे।
तीन जिलों को नहीं मिला मंत्री पद
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जलपाईगुड़ी, दक्षिण दिनाजपुर और कालिम्पोंग के किसी भी विधायक को मंत्री पद नहीं मिला है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया
जलपाईगुड़ी में लोगों ने इस फैसले पर असंतोष जताया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिले की सभी सीटें जीतने के बावजूद एक भी मंत्री न मिलना निराशाजनक है, हालांकि वे अभी भी पार्टी से उम्मीद लगाए हुए हैं।