नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं करने के फैसले के पीछे हितों के टकराव (Conflict of Interest) की आशंका को एक प्रमुख वजह बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए, जिससे भविष्य में किसी मामले की सुनवाई के दौरान निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति पैदा हो। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने अपने सहयोगी न्यायाधीशों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद फैसला लिया है।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांगा था समय
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। दोनों नेता सोमवार को शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच उनसे मिलकर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इस ज्ञापन के जरिए चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, 'वोट चोरी' के आरोपों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दे उठाए जाने थे। विपक्षी नेताओं ने चुनाव में बैलेट पेपर की व्यवस्था बहाल करने की मांग भी रखी थी।
चिट्ठी के जरिए पहले ही दे दिया था जवाब
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उन्हें विपक्षी नेताओं का पत्र मिला था और उन्होंने रविवार रात ही उसका जवाब दे दिया था। उन्होंने कहा कि पत्र में मुलाकात करने में असमर्थता के कुछ कारण स्पष्ट किए गए थे। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे इन कारणों के बारे में विस्तार से पूछा, तो उन्होंने पत्र की गोपनीयता बनाए रखने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि पत्र की विषयवस्तु के बारे में संबंधित नेताओं से ही जानकारी ली जाए।
‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं’
मुलाकात से इनकार करने का अर्थ यह नहीं है कि विपक्षी नेताओं या आम नागरिकों के लिए न्याय पाने का रास्ता बंद हो गया है। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे प्रत्येक नागरिक के लिए खुले हैं। आम व्यक्ति हो या किसी निर्वाचित संस्था का सदस्य, हर नागरिक को कानून के अनुसार अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अदालत कानून के अनुरूप मामलों की सुनवाई करेगी और पात्र लोगों को उनके अधिकार दिलाने के लिए उचित कदम उठाएगी।
एक देश, एक चुनाव पर भी जताई थी ऐसी आशंका
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी बताया कि एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के साथ मुलाकात को लेकर भी हितों के टकराव की संभावना पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि संबंधित विषय भविष्य में अदालत के सामने आ सकता है। ऐसे में न्यायपालिका के लिए पहले से प्रशासनिक स्तर पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। इसी वजह से उन्होंने और उनके सहयोगियों ने संभावित हितों के टकराव से बचने का निर्णय लिया।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी पाबंदियों के बारे में पूछे जाने पर CJI ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और उनके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने के सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने दोहराया कि संबंधित शिकायतों को अदालत के समक्ष रखने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य न्यायाधीश का संदेश स्पष्ट है कि न्याय पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा सभी के लिए खुला है, लेकिन किसी मामले को उठाने के लिए उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।