भोपाल | मध्य प्रदेश में रेलवे परियोजनाओं को गति देने और उनके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मोहन सरकार ने अहम प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य में रेलवे प्रोजेक्ट्स की नियमित निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए चार स्तरों पर समितियों का गठन किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति और उपयोगिता सेवाओं (यूटिलिटी) की शिफ्टिंग जैसी समस्याओं की समीक्षा कर समयबद्ध समाधान पर जोर दिया जाएगा।
चार स्तरों पर होगी रेलवे परियोजनाओं की समीक्षा
सरकार ने रेलवे परियोजनाओं की निगरानी के लिए राज्य, संभाग, जिला और प्रमुख सचिव स्तर पर समितियों का ढांचा तैयार किया है। हर स्तर पर समीक्षा बैठकों की अलग-अलग समयसीमा निर्धारित की गई है, ताकि परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
- राज्य स्तरीय समिति: मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में गठित यह समिति हर छह महीने में समीक्षा बैठक करेगी। आवश्यकता पड़ने पर विशेष बैठक भी बुलाई जा सकेगी। राज्य स्तर पर परियोजनाओं से जुड़ी बड़ी प्रशासनिक और विभागीय समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया जाएगा।
- संभाग स्तरीय समिति: संभाग स्तर पर हर दो महीने में बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में संबंधित क्षेत्रों में चल रहे रेलवे प्रोजेक्ट्स की प्रगति और सामने आ रही बाधाओं की समीक्षा होगी।
- जिला स्तरीय समिति: कलेक्टर की अध्यक्षता में हर महीने समीक्षा बैठक होगी। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण, निर्माण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना होगा।
- प्रमुख सचिव स्तर: इस स्तर पर हर तीन महीने में परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। संबंधित विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने और लंबित मामलों पर कार्रवाई की निगरानी पर जोर रहेगा।
रेलवे और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच बढ़ेगा समन्वय
इन समितियों में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मध्य प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और संबंधित जिलों के कलेक्टरों को शामिल किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। रेलवे परियोजनाओं के दौरान अक्सर जमीन उपलब्ध कराने, वन संबंधी मंजूरी लेने, बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं को स्थानांतरित करने और निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुमति हासिल करने में समय लगता है। नई निगरानी व्यवस्था के जरिए इन मामलों को संबंधित स्तर पर उठाकर समाधान की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश की जाएगी।
नई रेल लाइन से लेकर मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं पर फोकस
नई व्यवस्था का लाभ प्रदेश में चल रही विभिन्न प्रकार की रेलवे परियोजनाओं को मिलने की उम्मीद है। इनमें नई रेल लाइन बिछाने, गेज कन्वर्जन यानी आमान परिवर्तन और मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा से निर्माण की स्थिति, लंबित मंजूरियों और काम पूरा करने में आ रही अड़चनों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही रेलवे ओवरब्रिज (ROB) और रेलवे अंडरब्रिज (RUB) के निर्माण कार्यों की प्रगति पर भी बेहतर निगरानी संभव होगी।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
रेलवे परियोजनाओं में तेजी आने से भविष्य में रेल संपर्क बेहतर होने, यातायात संबंधी समस्याएं कम होने और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक सेवाएं मिलने की संभावना है। रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज के निर्माण से रेल पटरियों के कारण प्रभावित होने वाले सड़क यातायात को भी राहत मिल सकती है। हालांकि, समितियों का गठन अपने आप में परियोजनाओं के जल्द पूरा होने की गारंटी नहीं है। वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि लंबित मामलों का कितनी तेजी से निराकरण होता है और संबंधित विभाग तय समयसीमा में कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।