कन्नूर - केरल के कन्नूर में एक मैरिज ब्यूरो की लापरवाही पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मैरिज ब्यूरो को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। मामला उस व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने शादी के लिए मैरिज ब्यूरो में पंजीकरण कराया था, लेकिन नौ साल बीत जाने के बावजूद उसे एक भी उपयुक्त रिश्ता उपलब्ध नहीं कराया गया।
रजिस्ट्रेशन फीस लेने के बाद नहीं निभाई जिम्मेदारी
शिकायतकर्ता ने मैरिज ब्यूरो में पंजीकरण कराने के लिए 3,000 रुपये की फीस जमा कराई थी। आरोप था कि शुल्क लेने के बावजूद ब्यूरो ने न तो कोई प्रभावी प्रयास किया और न ही विवाह के लिए कोई उपयुक्त प्रस्ताव उपलब्ध कराया। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि मैरिज ब्यूरो ने अपनी सेवा की जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। आयोग ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और सेवा में स्पष्ट कमी माना। आयोग ने मैरिज ब्यूरो को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 3,000 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस वापस करे। इसके अलावा मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 3,000 रुपये का मुआवजा तथा 2,000 रुपये मुकदमे का खर्च भी अदा करे।
समय पर भुगतान नहीं करने पर देना होगा ब्याज
आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि मैरिज ब्यूरो तय समय सीमा के भीतर शिकायतकर्ता को पूरी राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे निर्धारित दर से ब्याज के साथ रकम चुकानी होगी। यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो मैरिज ब्यूरो जैसी निजी सेवाओं का उपयोग करते हैं। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया कि शुल्क लेने के बाद सेवा उपलब्ध कराना संबंधित संस्थान की जिम्मेदारी है। यदि कोई संस्था वादा पूरा नहीं करती या लापरवाही बरतती है, तो उपभोक्ता को न्याय पाने का पूरा अधिकार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मैरिज ब्यूरो और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए भी एक चेतावनी है कि वे ग्राहकों से किए गए वादों और अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करें, अन्यथा उन्हें कानूनी कार्रवाई और मुआवजे का सामना करना पड़ सकता है।