नई दिल्ली. बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवाती तूफान मुरासु लगातार तीव्र हो रहा है। 1 नवंबर को यह गहन अवदाब से चक्रवाती तूफान में बदल गया और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा उससे सटे पश्चिम-मध्य हिस्से में केंद्रित रहा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 2 नवंबर की सुबह तक और शक्तिशाली होने की संभावना है। इसके 2 नवंबर को प्रचंड चक्रवाती तूफान का रूप लेने का अनुमान है। यह बदलाव तूफान को अधिक खतरनाक बना सकता है, क्योंकि इसकी हवाओं की गति बढ़ने के साथ तटीय क्षेत्रों में तेज बारिश और समुद्र में उथल-पुथल का खतरा भी बढ़ेगा। इसलिए आने वाले 48 घंटे दक्षिणी और पूर्वी तटवर्ती क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
120 किमी प्रति घंटे की हवाएं, आंध्र प्रदेश के तट पर खतरा
मुरासु के 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की प्रबल संभावना है। उस समय इसके प्रचंड चक्रवाती तूफान बने रहने और हवा की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। इतनी तेज हवाएं पेड़ों, बिजली के खंभों, कमजोर मकानों और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बिजली और संचार व्यवस्था बाधित होने के साथ सड़क तथा रेल यातायात भी प्रभावित हो सकता है। तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति खतरनाक हो सकती है और निचले क्षेत्रों में जलभराव का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान तूफान की अंतिम तीव्रता, उसके मार्ग और तट पार करने के समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दक्षिण भारत में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका
तूफान के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में व्यापक बारिश होने का पूर्वानुमान है। 1 से 7 नवंबर के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में वर्षा का दौर जारी रह सकता है। केरल और माहे में भी पूरे सप्ताह अलग-अलग स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। तटीय तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 2 से 5 नवंबर और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 3 से 5 नवंबर के बीच वर्षा हो सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 2 से 4 नवंबर, रायलसीमा में 2 से 3 नवंबर तथा तेलंगाना में 3 से 4 नवंबर को भारी बारिश की आशंका है। लगातार और तेज वर्षा से निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ तथा यातायात बाधित होने जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
मध्य भारत में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश पर असर
मुरासु का प्रभाव मध्य भारत तक पहुंचने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 नवंबर और पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 5 नवंबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। विदर्भ में 2 से 5 नवंबर तथा छत्तीसगढ़ में 1 और 2 नवंबर के साथ 5 से 7 नवंबर के दौरान वर्षा का अनुमान है। छत्तीसगढ़ में 3 और 4 नवंबर को बारिश का दायरा और तीव्रता बढ़ सकती है। इन दिनों कुछ स्थानों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। 2 नवंबर को छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में आंधी-तूफान तथा बिजली गिरने की चेतावनी भी है। तेज बारिश और हवाओं से खुले में काम करने वाले लोगों, किसानों तथा कमजोर ढांचों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होगी।
ओडिशा, झारखंड, बंगाल और बिहार में भी बारिश का खतरा
पूर्वी भारत के कई राज्यों में भी तूफान के प्रभाव से मौसम बिगड़ सकता है। झारखंड तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 1 से 4 नवंबर तक कहीं-कहीं बारिश होने का अनुमान है। गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 1 से 3 नवंबर और बिहार में 1 तथा 2 नवंबर को वर्षा हो सकती है। ओडिशा में 2 से 4 नवंबर के बीच बारिश की तीव्रता बढ़ने की आशंका है। दक्षिण ओडिशा में 3 और 4 नवंबर को बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी 1 से 7 नवंबर तक वर्षा हो सकती है। विशेष रूप से दक्षिणी ओडिशा में तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भरने और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की तैयारियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
उत्तर भारत में भी बदलेगा मौसम, सतर्कता जरूरी
चक्रवाती गतिविधियों के बीच उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 1, 2 और 5 नवंबर को कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 तथा 2 नवंबर को वर्षा का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी इन दोनों दिनों के दौरान बारिश हो सकती है। इसके अलावा, 1 और 2 नवंबर को उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्का से मध्यम कोहरा छाने की आशंका है। मुरासु का सबसे गंभीर प्रभाव दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में रहने का अनुमान है, लेकिन इसके व्यापक वर्षा प्रभाव को देखते हुए अन्य राज्यों में भी सावधानी आवश्यक है। तटीय क्षेत्रों के लोग समुद्र में जाने से बचें, सुरक्षित स्थानों पर रहें और मौसम विभाग तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। तूफान की दिशा और तीव्रता में बदलाव के साथ चेतावनियां भी बदल सकती हैं, इसलिए नवीनतम आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।