नई दिल्ली. लंबे इंतजार के बाद अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक निकट दिखाई दे रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान मौसमीय परिस्थितियां मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बन रही हैं। यदि अनुमान सही साबित होता है तो इस वर्ष राजधानी में मानसून का आगमन हाल के वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत देर से दर्ज किया जाएगा। मौसम विभाग का मानना है कि मानसूनी हवाओं की सक्रियता बढ़ने के साथ राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां तेज हो सकती हैं, जिससे भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिलने की संभावना है।
इन राज्यों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है दक्षिण-पश्चिम मानसून
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर अरब सागर, गुजरात के अधिकांश हिस्सों, दमन एवं दीव, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा तथा पंजाब के कई क्षेत्रों में अपनी प्रगति दर्ज की है। आगामी दो दिनों में इसके राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर भारत के शेष क्षेत्रों में और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की यह प्रगति खरीफ फसलों की बुआई और जलाशयों के जलस्तर में सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राजधानी में येलो अलर्ट, हल्की से मध्यम वर्षा के आसार
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए बुधवार रात से लेकर गुरुवार तक सामान्यतः बादल छाए रहने तथा हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना व्यक्त की है। विभाग के अनुसार इस दौरान अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान लगभग 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लगातार बनी हुई उमस से भी राहत मिलने की संभावना है। हालांकि कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ अल्पकालिक वर्षा भी दर्ज की जा सकती है।
हाल के वर्षों में कब पहुंचा था दिल्ली में मानसून?
मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में मानसून 25 जून को दिल्ली पहुंचा था, जबकि वर्ष 2021 में 13 जुलाई को राजधानी में इसकी सबसे विलंबित एंट्री दर्ज की गई थी। वर्ष 2022 में मानसून ने 30 जून को दिल्ली में प्रवेश किया, जबकि वर्ष 2023 में यह 25 जून को पहुंचा था। वर्ष 2024 में राजधानी में मानसून 28 जून को सक्रिय हुआ था और इसके बाद शीघ्र ही पूरे देश में फैल गया। इस वर्ष मानसून की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिसके चलते दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इसके आगमन में विलंब देखने को मिला है।
अभी तक सीमित रही वर्षा, लेकिन बदलेगा मौसम का मिजाज
बुधवार को राजधानी के अधिकांश मौसम केंद्रों पर दिनभर मापने योग्य वर्षा दर्ज नहीं की गई। हालांकि पिछले 24 घंटों के दौरान सफदरजंग, पालम, अयानगर तथा रिज क्षेत्र में अत्यंत हल्की वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि लोधी रोड क्षेत्र शुष्क रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के सक्रिय होते ही वर्षा की तीव्रता और क्षेत्रीय विस्तार दोनों में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही वातावरण में नमी बढ़ेगी और बादलों की सक्रियता भी अधिक देखने को मिलेगी।
कृषि, जल संसाधनों और जनजीवन के लिए राहत की उम्मीद
इस वर्ष जून महीने में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज होने के कारण कृषि, पेयजल आपूर्ति और जलाशयों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून का उत्तर भारत में सक्रिय होना किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए राहतभरी खबर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी सप्ताहों में सामान्य अथवा उससे अधिक वर्षा होती है तो खरीफ फसलों की बुआई को गति मिलेगी, जलाशयों का स्तर सुधरेगा और भीषण गर्मी का प्रभाव भी कम होगा। हालांकि मौसम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्षा का वितरण सभी क्षेत्रों में समान नहीं रहेगा, इसलिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमानों पर लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।