नई दिल्ली - लोकसभा सीटों के परिसीमन और वर्ष 2029 से महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए केंद्र सरकार संविधान संशोधन विधेयक को संसद से पारित कराने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। इसी बीच सरकार को एक बड़ी राजनीतिक राहत मिलने के संकेत मिले हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के बाद अब द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने भी अपने रुख में नरमी दिखाई है।
DMK ने रखी शर्त, बातचीत के लिए तैयार
22 सांसदों वाली DMK ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार यह स्पष्ट गारंटी देती है कि परिसीमन से तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के हितों को कोई नुकसान नहीं होगा, तो पार्टी इस मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सरकार को पहले से ही हर राज्य की लोकसभा सीटों का निश्चित हिस्सा स्पष्ट करना चाहिए। ऐसा होने पर दक्षिणी राज्यों के साथ किसी प्रकार के भेदभाव की आशंका नहीं रहेगी और यही बातचीत का आधार बन सकता है। हालांकि DMK ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय पर अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।
NCP ने भी दिए थे समर्थन के संकेत
कुछ दिन पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि यदि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है तो उनकी पार्टी इस विधेयक का विरोध नहीं करेगी। DMK के ताजा रुख के बाद सरकार की उम्मीदें और मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।
सरकार कर सकती है ड्राफ्ट में बदलाव
सूत्रों के अनुसार सरकार विधेयक के मसौदे में कुछ संशोधन करने पर भी विचार कर रही है। इसमें गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को लिखित रूप में शामिल किया जा सकता है, जिसमें उन्होंने सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की बात कही थी। माना जा रहा है कि इससे उन दलों और सांसदों का भरोसा बढ़ेगा जो अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं कर पाए हैं। सरकार DMK और NCP के अलावा तृणमूल कांग्रेस (TMC) तथा शिवसेना (उद्धव गुट) के कुछ असंतुष्ट सांसदों का भी समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है।
राज्यसभा में भी मजबूत स्थिति
सरकारी सूत्रों का दावा है कि राज्यसभा में संख्या बल पहले से अपेक्षाकृत बेहतर है। जैसे ही दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन सुनिश्चित होगा, सरकार संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा पेश कर सकती है। दिलचस्प बात यह है कि जिस DMK ने 16 अप्रैल को परिसीमन विधेयक की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था, अब वही पार्टी नरम रुख अपनाती दिख रही है। साथ ही DMK ने कांग्रेस पर भी हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने INDIA गठबंधन को कमजोर किया।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब DMK अपने राजनीतिक फैसले कांग्रेस के रुख का इंतजार किए बिना स्वतंत्र रूप से लेगी। यदि यह संविधान संशोधन विधेयक पारित होता है, तो लोकसभा सीटों का नया परिसीमन होगा और वर्ष 2029 से संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा।