वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर अमेरिका-ईरान तनाव के प्रभाव से जूझ रहे विमानन क्षेत्र को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विमानन मंत्रालय ने देश के 34 प्रमुख हवाई अड्डों को निर्देश दिया है कि वे घरेलू उड़ानों के लिए लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की कटौती करें। यह कदम एयरलाइंस की लागत को कम करने और यात्रियों पर बढ़ते किराए के बोझ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नियामक संस्था का तत्काल प्रभाव से आदेश
इस संबंध में एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ने मंगलवार को औपचारिक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत दिल्ली हवाई अड्डा, मुंबई हवाई अड्डा, बेंगलुरु हवाई अड्डा और हैदराबाद हवाई अड्डा सहित अन्य बड़े हवाई अड्डों के संचालकों को तत्काल प्रभाव से शुल्क में कटौती लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्णय तीन महीने की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा और इसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।
हवाई किराए पर नियंत्रण की रणनीति
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि घरेलू हवाई किराए में अनियंत्रित वृद्धि न हो। केरल और पश्चिम बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यात्रियों को राहत देना एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गया है। हाल ही में घरेलू विमानन टर्बाइन ईंधन की कीमतों में वृद्धि की सीमा 25 प्रतिशत तक तय की गई थी, जिससे लागत में वृद्धि को सीमित रखने का प्रयास किया गया है।
पीपीपी मॉडल में दुर्लभ सरकारी हस्तक्षेप
हवाई अड्डों के शुल्क निर्धारण में सरकार का यह कदम असाधारण माना जा रहा है, क्योंकि देश के अधिकांश बड़े हवाई अड्डे सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर संचालित होते हैं। ऐसे में शुल्क संरचना में सीधे हस्तक्षेप करना विरल घटना है। फिर भी वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनी रहे और यात्रियों पर अतिरिक्त भार न पड़े।
आदेश की प्रमुख शर्तें और प्रावधान
जारी आदेश के अनुसार सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर एयरोनॉटिकल टैरिफ के अंतर्गत आने वाले लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में मौजूदा दरों से 25 प्रतिशत की कमी की जाएगी। यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू होगी और केवल घरेलू उड़ानों पर तीन महीने तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि के दौरान होने वाली किसी भी राजस्व कमी को भविष्य में टैरिफ निर्धारण के दौरान समायोजित किया जाएगा।
ईंधन कीमतों में उछाल और एयरलाइंस पर दबाव
इसी महीने सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में क्रमशः 25 प्रतिशत और 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है। इसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ा है। एअर इंडिया समूह और इंडिगो जैसी प्रमुख कंपनियों ने पहले ही अपने फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था।
यात्रियों के लिए राहत और भविष्य की उम्मीदें
इस निर्णय से उम्मीद की जा रही है कि एयरलाइंस को कुछ राहत मिलेगी और वे इसका लाभ यात्रियों तक पहुंचाएंगी। यदि यह कदम प्रभावी साबित होता है, तो भविष्य में भी इस तरह के हस्तक्षेप देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल यह फैसला विमानन क्षेत्र और आम यात्रियों दोनों के लिए राहत की उड़ान लेकर आया है।