E20 ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होने वाला जैव ईंधन है। केंद्र सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 से अब तक इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और करीब 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता कम हुई है।
नीति आयोग के रोडमैप में क्या था पूरा प्लान?
नीति आयोग ने वर्ष 2021 में जारी अपने रोडमैप में सुझाव दिया था कि अप्रैल 2022 तक पूरे देश में E10 पेट्रोल लागू किया जाए और अप्रैल 2023 से चरणबद्ध तरीके से E20 ईंधन की शुरुआत की जाए। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि इस परिवर्तन में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, वाहन निर्माता, सर्विस सेंटर, डिस्टिलरी और अन्य सभी हितधारकों की समान भागीदारी आवश्यक होगी। साथ ही यह भी सिफारिश की गई थी कि जब तक बड़ी संख्या में वाहन पूरी तरह E20 के अनुकूल नहीं हो जाते, तब तक E10 पेट्रोल भी बाजार में उपलब्ध रहना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं के पास विकल्प बना रहे।
विपक्ष किन मुद्दों पर उठा रहा है सवाल?
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि E20 नीति को पर्याप्त तैयारी और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि नीति आयोग की रिपोर्ट में E10 और E20 दोनों विकल्प उपलब्ध रखने की बात कही गई थी, जबकि वर्तमान में कई स्थानों पर उपभोक्ताओं के लिए विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर पुराने वाहनों के मालिक भी अपनी गाड़ियों की अनुकूलता, रखरखाव और प्रदर्शन को लेकर चिंता जता रहे हैं। यही कारण है कि यह मामला सार्वजनिक बहस के साथ-साथ न्यायिक स्तर तक भी पहुंच चुका है।
माइलेज को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया था?
नीति आयोग की रिपोर्ट में स्वीकार किया गया था कि अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन से माइलेज पर कुछ असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन चार पहिया वाहनों के इंजन मूल रूप से E0 के लिए डिजाइन किए गए थे और बाद में E10 तक के लिए कैलिब्रेट किए गए, उनमें E20 के उपयोग से लगभग 6 से 7 प्रतिशत तक माइलेज घटने की संभावना जताई गई थी। इसी प्रकार पुराने दोपहिया वाहनों में लगभग 3 से 4 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। हालांकि जिन नए वाहनों को पहले से E10 के अनुरूप विकसित किया गया और बाद में E20 के लिए कैलिब्रेट किया गया, उनमें माइलेज पर केवल 1 से 2 प्रतिशत तक प्रभाव पड़ने का अनुमान व्यक्त किया गया था।
समाधान के लिए क्या सुझाव दिए गए थे?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इंजन के हार्डवेयर में मामूली तकनीकी बदलाव और बेहतर ट्यूनिंग के माध्यम से माइलेज में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माताओं की संस्था (SIAM) के हवाले से सुझाव दिया गया था कि वाहन निर्माता इंजन डिजाइन में आवश्यक सुधार कर ईंधन दक्षता बनाए रख सकते हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई थी कि यदि इथेनॉल मिश्रण के कारण उपभोक्ताओं को माइलेज में कमी का सामना करना पड़े तो E10 और E20 ईंधन पर करों में राहत देने जैसे विकल्पों पर भी सरकार विचार कर सकती है, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।