नई दिल्ली. देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार बहस चल रही है। सोशल मीडिया पर ई20 ईंधन को लेकर वाहन खराब होने के कई दावे सामने आने के बाद अब E25 पेट्रोल को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया था। इन अटकलों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि E25 ईंधन अभी केवल परीक्षण के चरण में है। उन्होंने कहा कि इसे बाजार में लागू करने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और सरकार किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में कदम नहीं उठाएगी। सभी तकनीकी पहलुओं का व्यापक अध्ययन पूरा होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञों की राय को मिलेगी प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि E25 ईंधन पर विभिन्न स्तरों पर परीक्षण जारी हैं और फिलहाल इन परीक्षणों के पूरा होने की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है। सरकार का उद्देश्य केवल वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि नए ईंधन से वाहनों के प्रदर्शन, इंजन की क्षमता और उपभोक्ताओं के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक संस्थानों, वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही किसी प्रकार का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
ई20 से इंजन खराब होने के दावों पर सरकार का पक्ष
पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले ई20 ईंधन को लेकर सोशल मीडिया पर कई वीडियो और दावे वायरल हुए हैं, जिनमें वाहनों के खराब होने के लिए इस ईंधन को जिम्मेदार बताया गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि अब तक सामने आई शिकायतों की जांच में इंजन संबंधी समस्याओं के पीछे अन्य तकनीकी कारण पाए गए हैं और सीधे तौर पर ईंधन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी जांच को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति न बने।
माइलेज पर पड़ सकता है सीमित प्रभाव, लेकिन कई अन्य कारक भी जिम्मेदार
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को लेकर कहा कि एथेनॉल का कैलोरीफिक मान सामान्य पेट्रोल की तुलना में कुछ कम होता है, जिससे माइलेज पर हल्का प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी वाहन का वास्तविक माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सड़क की गुणवत्ता, यातायात की स्थिति, वाहन की तकनीकी अवस्था और चालक की ड्राइविंग शैली जैसे अनेक कारकों से भी प्रभावित होता है। इसलिए केवल ईंधन को माइलेज में बदलाव का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।
स्वच्छ ऊर्जा और आयात निर्भरता घटाने की दिशा में सरकार की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उद्देश्य केवल वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना भी है। सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ मेथनॉल जैसे अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं को विभिन्न ईंधन विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी आवश्यकता और वाहन की अनुकूलता के अनुसार उपयुक्त विकल्प चुन सकें।
तकनीकी तैयारी और उपभोक्ता विश्वास दोनों होंगे निर्णायक
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि किसी भी नए ईंधन को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले वाहन उद्योग, ईंधन वितरण नेटवर्क और उपभोक्ताओं की तैयारी सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। यदि तकनीकी परीक्षण संतोषजनक रहते हैं और सभी हितधारकों के बीच सहमति बनती है, तभी E25 जैसे ईंधन का सफल क्रियान्वयन संभव होगा। फिलहाल सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वैज्ञानिक प्रमाणों, तकनीकी विश्वसनीयता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।