नई दिल्ली: भारत समेत दुनिया के कई देशों में आने वाले महीनों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी वैश्विक जलवायु को लेकर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के अनुसार प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी के कारण जून से अगस्त के बीच अल नीनो विकसित होने की 80 प्रतिशत संभावना है, जबकि नवंबर तक इसके बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर बारिश, तापमान और कृषि पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
अल नीनो को लेकर WMO की बड़ी चेतावनी
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा है कि प्रशांत महासागर के समुद्री जल का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है। यह मौसमीय घटना वैश्विक स्तर पर वर्षा चक्र को प्रभावित करती है और कई क्षेत्रों में सूखा, बाढ़, हीटवेव तथा चरम मौसम की घटनाओं को जन्म दे सकती है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अल नीनो मजबूत होता है तो इसका असर एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका समेत दुनिया के कई हिस्सों पर पड़ सकता है।
भारत में सामान्य से कम बारिश की आशंका
मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बनी हुई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार भी फिलहाल धीमी है और इसके केरल पहुंचने में देरी हुई है। आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार इसके 4 जून के आसपास पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। यदि बारिश में कमी आती है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
IOD और MJO बचा सकते हैं मानसून
विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव के बावजूद भारत में मानसून पूरी तरह कमजोर हो, यह जरूरी नहीं है। इसके पीछे दो महत्वपूर्ण मौसमीय सिस्टम जिम्मेदार हो सकते हैं। पहला इंडियन ओशन डायपोल (IOD), जिसे हिंद महासागर का अल नीनो भी कहा जाता है। यदि इसका सकारात्मक चरण सक्रिय रहता है तो यह अल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर सकता है। दूसरा मैडेन-जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO) है, जो बादलों और हवाओं का एक वैश्विक चक्र है। जब यह भारत के ऊपर सक्रिय होता है तो कमजोर मानसून के दौरान भी अच्छी बारिश के दौर देखने को मिलते हैं।
राज्यों को तैयारी के निर्देश
संभावित सूखे और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जिलास्तर पर पहले से तैयार की गई कार्ययोजनाओं को तुरंत लागू किया जाए। साथ ही किसानों तक मौसम और कृषि संबंधी जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल सेंटर सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
आखिर क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जो तब बनती है जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसके कारण दक्षिण अमेरिका के तटवर्ती इलाकों में समुद्र का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह गर्म पानी वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित करता है, जिससे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौसम के पैटर्न बदल जाते हैं। भारत में अक्सर अल नीनो का संबंध कमजोर मानसून और कम बारिश से जोड़ा जाता है।
समुद्र के भीतर बढ़ी चिंता
WMO के वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र की सतह के नीचे का पानी सामान्य से लगभग 6 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म पाया गया है। यह अतिरिक्त गर्मी धीरे-धीरे सतह तक पहुंच रही है और अल नीनो को और मजबूत बना सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही कारण है कि आने वाले महीनों में मौसम का स्वरूप अधिक अस्थिर और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकारों को युद्धस्तर पर तैयारी की सलाह
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने सभी संभावित प्रभावित देशों को पहले से तैयार रहने की सलाह दी है। संगठन का कहना है कि समय पर चेतावनी, बेहतर जल प्रबंधन, कृषि रणनीति और आपदा तैयारी के जरिए संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एजेंसी ने यह भी याद दिलाया कि 2023-24 का अल नीनो इतिहास के सबसे शक्तिशाली अल नीनो एपिसोड में शामिल रहा था, जिसने वैश्विक तापमान के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।