नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक असंतोष और फैसलों पर मतभेद की खबर सामने आने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। एक सर्वभारतीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच गंभीर असहमति थी। रिपोर्ट के अनुसार, बीते 10 महीनों में दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस खुलासे के बाद कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए सीईसी के इस्तीफे की मांग की है, वहीं एनडीए के प्रमुख सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बयान ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
'आयोग को जनता का भरोसा बनाए रखना होगा': चिराग पासवान
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के मन में किसी भी प्रकार का संदेह पैदा होना गलत है। उन्होंने कहा, "विपक्ष क्या कह रहा है, उससे मुझे मतलब नहीं है क्योंकि राजनीति करना उनका काम है। लेकिन यदि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर इस तरह के सवाल उठ रहे हैं, तो यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वे सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें और इन अटकलों पर विराम लगाएं।" चिराग ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास सबसे ऊपर है।
'ज्ञानश कुमार ने लोकतंत्र पर हमला किया': राहुल गांधी का गंभीर आरोप
दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाथ में संविधान की प्रति लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आयोग पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के भीतर नियमों की अनदेखी कर जनता के वोटों पर डाका डाला गया है। उन्होंने कहा, "ज्ञानश कुमार ने देश विरोधी काम किया है और लोगों के वोट छीनकर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है।" कांग्रेस नेता ने 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में धांधली की बात कहते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
मतदाता सूची और 'SIR' प्रक्रिया पर उठे सवाल
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और हटाए गए नामों को पुनः शामिल करने की प्रक्रिया (SIR) में दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी। उनके विरोध के बावजूद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने एकल फैसले लिए। इस मुद्दे को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (Gen-Z) समेत कई अन्य राजनीतिक समूहों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीईसी के इस्तीफे की मांग उठाई है। फिलहाल इस राजनीतिक घमासान के बीच देश की नजरें चुनाव आयोग की आधिकारिक सफाई पर टिकी हुई हैं।