नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध के बीच दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के ब्लॉक होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है और भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने आज एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने उच्च मात्रा वाले एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह से खत्म (Nil) कर दिया है।
इन 4 प्रकार के एथेनॉल ईंधन पर टैक्स हुआ 'शून्य'
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले चार नए ईंधन वेरिएंट्स पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी, विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस समेत सभी टैक्स पूरी तरह माफ कर दिए हैं। ये चार श्रेणियां इस प्रकार हैं:
E22: 22 प्रतिशत एथेनॉल और 78 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण।
E25: 25 प्रतिशत एथेनॉल और 75 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण।
E27: 27 प्रतिशत एथेनॉल और 73 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण।
E30: 30 प्रतिशत एथेनॉल और 70 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण।
सरकार के इस कदम से बाजार में इन चारों वेरिएंट्स के एथेनॉल मिश्रित ईंधन की कीमतें काफी कम हो जाएंगी, जिससे उपभोक्ताओं को ग्रीन और किफायती ईंधन चुनने का प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, सामान्य पेट्रोल की टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विदेशी तेल के दबाव को कम करने की रणनीति
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। वर्तमान में होर्मुज संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना दिया है।
एथेनॉल एक प्रकार का बायो-फ्यूल (जैव ईंधन) है, जिसे गन्ने, मक्के और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। केंद्र सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का पेट्रोल में उपयोग बढ़ाकर न सिर्फ विदेशी आयात बिल को कम किया जा सकता है, बल्कि संकट के समय देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय: पश्चिम एशिया संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वह अपनी ईंधन आत्मनिर्भरता को तेजी से बढ़ाए। मोदी सरकार आने वाले समय में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-Fuel Vehicles) और शुद्ध एथेनॉल के दम पर गाड़ियां चलाने का बड़ा खाका तैयार कर चुकी है। टैक्स छूट का यह फैसला इसी दिशा में बढ़ाया गया एक रणनीतिक कदम है।
वित्त मंत्रालय का यह फैसला फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही ऑटोमोबाइल कंपनियों और देश के किसानों, दोनों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा, क्योंकि इससे एथेनॉल की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है।