प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम साझा करते हुए जनप्रतिनिधियों के कर्तव्यों और आदर्श नेतृत्व की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने श्लोक ‘चातुर्वर्ण्यस्य धर्माश्च रक्षितव्या महीक्षिता। धर्मसंकररक्षा च राज्ञां धर्म: सनातन:॥’ साझा किया।
प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के माध्यम से बताया कि जनप्रतिनिधि का प्रमुख दायित्व समाज के सभी वर्गों में न्याय, समरसता और लोककल्याण को बढ़ावा देना है। साथ ही सामाजिक व्यवस्था, नैतिक मूल्यों और धर्म की रक्षा करना भी आदर्श नेतृत्व की पहचान है।
सेवा और समर्पण को बताया नेतृत्व की आधारशिला
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि जनप्रतिनिधि को सेवा, समर्पण और कुशल नेतृत्व के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व का उद्देश्य केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि समाज में संतुलन, न्याय और विकास सुनिश्चित करना भी है।
10 जून को भी दिया था सुशासन का संदेश
इससे पहले 10 जून को प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए जनसेवा को सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी बताया था। उन्होंने श्लोक ‘सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः। विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥’ साझा किया था।
इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने कहा था कि जो जनप्रतिनिधि सेवा को अपना धर्म मानकर जनता के कल्याण और सुरक्षा के लिए कार्य करता है तथा विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ विकास को आगे बढ़ाता है, वही जनविश्वास और सम्मान प्राप्त करता है।
12 वर्ष पूरे होने पर भी साझा किया था विशेष संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने 9 जून को केंद्र सरकार में अपने नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी देशवासियों के साथ एक विशेष सुभाषितम साझा किया था। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र निर्माण, जनसेवा और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना पर जोर दिया था।
उन्होंने संस्कृत श्लोक ‘आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते। हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥’ साझा करते हुए कहा था कि श्रेष्ठ कर्म, लोककल्याण और दूसरों के हितकारी कार्यों का सम्मान करना ही सच्ची बुद्धिमत्ता की पहचान है।
राष्ट्र निर्माण और लोककल्याण पर लगातार जोर
प्रधानमंत्री मोदी लगातार अपने सुभाषितम संदेशों के माध्यम से सुशासन, जनसेवा, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर विचार साझा कर रहे हैं। हालिया संदेशों में उन्होंने आदर्श नेतृत्व, जनकल्याण, सेवा और समर्पण को लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति बताया है।