लखनऊ - आर्थिक अपराध के मामलों को तीन माह के भीतर निस्तारित किया जाएगा। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों को तीन माह से अधिक समय तक लंबित न रखा जाए।
वित्तीय धोखाधड़ी और गबन पर सरकार का बड़ा एक्शन प्लान
वित्तीय धोखाधड़ी, जालसाजी, गबन और अन्य आर्थिक अपराध न केवल सरकारी संसाधनों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी आघात पहुंचाते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। अपने सरकारी आवास पर ईओडब्ल्यू के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ईओडब्ल्यू को आधुनिक तकनीक की मदद से जांच प्रणाली को और सशक्त बनाना होगा।
अब देरी नहीं, आर्थिक अपराधों की जांच होगी समयबद्ध
उन्होंने कहा कि तीन माह से अधिक समय तक जांच अपने पास रखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही यह नियम बनाया जाए कि कोई भी अधिकारी तीन माह से अधिक समय तक किसी मामले को लंबित नहीं रखेगा। समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 31 मई तक ईओडब्ल्यू ने 155 मामलों की जांच पूरी की है, जबकि 71 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।
डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
बैठक में केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस डिजिटल प्रणाली से मामलों के ऑनलाइन प्रबंधन व रियल टाइम मानिटरिंग में सुविधा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था से जांच की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक अपराधों की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।
बदलते दौर के वित्तीय अपराधों से सावधान रहने की अपील
उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में वित्तीय धोखाधड़ी, निवेश संबंधी ठगी, पोंजी स्कीम, मल्टीलेवल मार्केटिंग, चिट-फंड घोटाले और साइबर फ्राड जैसे अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसियों को आधुनिक संसाधनों और तकनीकी दक्षता से लैस करना समय की आवश्यकता है।