उत्तरप्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची बुधवार को जारी कर दी गई। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावों और आपत्तियों के निस्तारण तथा व्यापक सत्यापन प्रक्रिया के बाद इस सूची को अंतिम रूप दिया है। इस बार आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रत्येक पंचायत मतदाता को 9 अंकों का यूनिक पहचान नंबर भी जारी किया है।
हालांकि मतदाता सूची जारी होते ही कई जिलों में मतदाताओं को सूची डाउनलोड करने में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। आयोग का कहना है कि यह समस्या सर्वर और तकनीकी कारणों से उत्पन्न हुई है, जिसे जल्द दूर किया जाएगा।
29 लाख से अधिक मतदाताओं की हुई बढ़ोतरी
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए कुल 12 करोड़ 58 लाख 51 हजार 570 मतदाता पात्र होंगे। इससे पहले पंचायत मतदाता सूची में 12 करोड़ 29 लाख 50 हजार 52 मतदाता दर्ज थे। इस प्रकार मतदाताओं की संख्या में कुल 29 लाख 1 हजार 518 की वृद्धि हुई है।
2.32 करोड़ नए नाम जुड़े, 2.03 करोड़ नाम हटाए गए
मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान आयोग ने 2 करोड़ 32 लाख 24 हजार 805 नए मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए हैं। वहीं एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने, पता परिवर्तन, मतदाता की मृत्यु और अन्य कारणों से 2 करोड़ 3 लाख 23 हजार 287 नाम सूची से हटाए गए हैं।आयोग का मानना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन हुई है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
हर मतदाता को मिला 9 अंकों का यूनिक पहचान नंबर
इस बार पंचायत चुनाव में पहली बार प्रत्येक मतदाता को 9 अंकों का विशेष पहचान नंबर दिया गया है। इससे मतदाताओं की पहचान, डेटा प्रबंधन और चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था भविष्य में पंचायत चुनावों के संचालन को और अधिक पारदर्शी बनाएगी।
अभी घोषित नहीं हुआ चुनाव कार्यक्रम
प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है, लेकिन पंचायत चुनाव की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। चुनाव में देरी को देखते हुए राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को अगले छह महीने के लिए प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंप दी है।
ओबीसी आरक्षण पर आयोग करेगा अध्ययन
सरकार ने पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के मुद्दे पर अध्ययन के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग को छह महीने के भीतर विभिन्न जिलों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद अब पंचायत चुनाव की अधिसूचना और चुनाव कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।