भोपाल - मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के बाद पार्टी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और कांग्रेस ने इसे गंभीर मामला बताया है।
मीनाक्षी नटराजन का बयान
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला है और उनकी बातों को सुना गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले को एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा रही है और उन्हें अभी भी देश की संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है। मीनाक्षी नटराजन ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर उम्मीदवार को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
कांग्रेस का आरोप और दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का एक प्रतिनिधिमंडल इस मामले में चुनाव आयोग से मुलाकात कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी मिलने के बाद पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। दिग्विजय सिंह ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को “असंवैधानिक” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर एकजुट होकर लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी इस निर्णय को चुनौती देने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
कांग्रेस पर ‘फेस सेविंग’ का आरोप
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज होने पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकता है।सारंग ने दावा किया कि यदि चुनाव पूरी प्रक्रिया के साथ होता तो भी भाजपा राज्य में तीसरी सीट जीतने की स्थिति में थी। भारतीय जनता पार्टी के नेता ने कहा कि कांग्रेस के भीतर ही मीनाक्षी नटराजन के नाम पर असहमति थी और कई नेता खुले तौर पर उनके टिकट का विरोध कर रहे थे। विश्वास के अनुसार पार्टी में गुटबाजी साफ नजर आ रही थी। मंत्री सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को पहले से ही यह अंदाजा था कि मीनाक्षी नटराजन चुनाव में हार सकती हैं। इसी कारण पार्टी ने जानबूझकर नामांकन में ऐसी खामियां छोड़ीं, जिससे फॉर्म रिजेक्ट हो जाए और राजनीतिक शर्मिंदगी से बचा जा सके। उन्होंने इसे “फेस सेविंग रणनीति” बताया।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी गर्माहट
नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस जहां इसे प्रक्रियागत त्रुटि और अन्याय बता रही है, वहीं राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव को और अधिक रोचक बना दिया है।