कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद शुरू हुआ 'महा-विद्रोह' अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) रीताब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) ने बुधवार को विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए टीएमसी के आधिकारिक नेतृत्व को सीधी चुनौती दे दी है। रीताब्रता बनर्जी ने दावा किया कि उनके 'विद्रोही' खेमे में शामिल होने वाले विधायकों की संख्या अब 58 से बढ़कर 64 हो गई है और यह आंकड़ा हर गुजरते दिन के साथ और बड़ा होता जाएगा।
इसके साथ ही, दिल्ली में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी द्वारा कांग्रेस के साथ की जा रही बैठकों और टीएमसी के कांग्रेस में संभावित विलय की खबरों पर विराम लगाते हुए रीताब्रता ने दो टूक कहा, "हम ही असली तृणमूल हैं। हम किसी भी कीमत पर कांग्रेस में शामिल या विलीन नहीं हो रहे हैं।"
चौतरफा घिरे ममता और अभिषेक
इस समय तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व (ममता और अभिषेक) दोहरे दबाव (सेंसरशिप) में है। एक तरफ जहां बंगाल विधानसभा के भीतर उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक चुकी है, वहीं संसद में भी पार्टी पूरी तरह बिखर रही है।
लोकसभा में टूट: काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) को पहले ही पत्र लिख दिया है।
राज्यसभा में इस्तीफा: इसी हफ्ते राज्यसभा में टीएमसी के दो कद्दावर सांसदों— सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
इस राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए ही ममता और अभिषेक दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चक्कर काट रहे हैं, जहां सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी को व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है।
सायोनी घोष और माला राय भी बदलेंगी पाला?
सियासी गलियारों में उड़ रही अफवाहों के मुताबिक, लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों की सूची में दो और बड़े नाम जुड़ने वाले हैं। खबर है कि नवनिर्वाचित सांसद माला राय और टीएमसी की तेजतर्रार नेता व सांसद सायोनी घोष भी आधिकारिक नेतृत्व का साथ छोड़कर विद्रोही खेमे में शामिल होने जा रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिन पहले अभिषेक बनर्जी ने पुरानी सभी समितियों को भंग कर नई कमेटी बनाई थी, जिसमें माला राय और सायोनी घोष को भी जगह दी गई थी। इसके बावजूद उनके बागी होने की खबरों पर तंज कसते हुए ऋतব্রত बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की सांगठनिक क्षमता पर तीखा हमला बोला।
रीताब्रता बनर्जी का अभिषेक बनर्जी पर तीखा कटाक्ष:
"अभिषेक बनर्जी के संगठन की हकीकत अब सबके सामने है। उनके पास सिर्फ 'सांग' (तमाशा/जोकर) है, कोई 'गठन' (संगठन) नहीं है। हमारे विद्रोही खेमे की संख्या 64 को पार कर गई है और कल तक यह 65 भी हो सकती है। यह बिखराव रुकने वाला नहीं है। दिल्ली में बंद कमरों में कौन किसके साथ व्यक्तिगत स्तर पर बैठकें कर रहा है, उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है। हम फिर साफ कर दें— हम ही असली टीएमसी हैं, और हम कांग्रेस के साथ नहीं मिल रहे हैं।"
नेता प्रतिपक्ष के इस आक्रामक तेवर और लगातार बढ़ती संख्या बल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब 'असली टीएमसी बनाम नकली टीएमसी' की कानूनी और राजनीतिक जंग बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गई है।