हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। जून 2026 का महीना श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस महीने दो महत्वपूर्ण एकादशी तिथियां पड़ रही हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार 11 जून को परमा एकादशी और 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे कठिन और पुण्यदायी माना जाता है।
क्या एकादशी पर तुलसी को जल देना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि तुलसी माता भगवान विष्णु की परम प्रिय हैं और माता लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाती हैं। कहा जाता है कि एकादशी के दिन तुलसी माता स्वयं भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में उन्हें जल अर्पित करने से उनका व्रत भंग हो सकता है।
एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ना भी है वर्जित
धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना भी निषिद्ध माना गया है। यदि पूजा के लिए तुलसी दल की आवश्यकता हो तो उसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए। शास्त्रों में तुलसी के पत्तों को कभी बासी नहीं माना गया है, इसलिए पहले से रखे गए पत्तों का उपयोग पूजा में किया जा सकता है।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व
तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि विष्णु भगवान को तुलसी दल अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के समीप दीपक जलाना, विष्णु मंत्रों का जाप करना और भक्ति भाव से पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
एकादशी व्रत के प्रमुख नियम
एकादशी व्रत के दौरान भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन, फल और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप भी करते हैं।
अन्न का सेवन नहीं करने की मान्यता
एकादशी व्रत में चावल और अन्य अनाजों का सेवन वर्जित माना जाता है। कई लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु केवल जल या निर्जल रहकर भी व्रत का पालन करते हैं।
दान-पुण्य का मिलता है विशेष फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
परमा और निर्जला एकादशी का महत्व
परमा एकादशी को पापों के नाश और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी माना जाता है। वहीं निर्जला एकादशी का व्रत पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के समान फलदायी माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे विशेष पुण्य और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।