हिमाचल प्रदेश में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है। लाहौल-स्पीति में चट्टान गिरने से 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पूरे राज्य में बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं में अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने नुकसान का शुरुआती अनुमान 800 से 1000 करोड़ रुपये बताया है।
लाहौल-स्पीति में दर्दनाक हादसा, चट्टान गिरने से 13 की मौत
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। उदयपुर-किलाड़ (तांदी-संसारी राष्ट्रीय राजमार्ग) के पास एक टाटा सूमो टैक्सी पर अचानक पहाड़ी से विशाल चट्टानें गिर गईं। हादसे में वाहन में सवार 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि सभी यात्री कुल्लू-मनाली से पांगी की ओर जा रहे थे। रास्ते में कढ़ू नाला बंद होने की सूचना मिलने पर वे उदयपुर से आगे तिंदी क्षेत्र में रुके थे। इसी दौरान यह हादसा हो गया।
मानसून में अब तक 80 लोगों की मौत
प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही बारिश से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित है और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है।
800 से 1000 करोड़ रुपये का नुकसान
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) के अनुसार, मानसून के कारण अब तक हिमाचल प्रदेश को 800 से 1000 करोड़ रुपये के बीच आर्थिक नुकसान हो चुका है। प्रदेशभर में 121 सड़कें अभी भी बंद हैं, जिनमें अधिकांश संपर्क मार्ग शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन सड़कों को जल्द बहाल करने के प्रयास कर रहे हैं।
बादल फटने से कई गांवों में तबाही
हाल ही में कांगड़ा जिले के शाहपुर क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही मची। बोह घाटी के स्पैड़ा और गढ़गून गांवों में आई बाढ़ में 18 मकान और एक स्कूल भवन बह गया। इस हादसे में एक महिला और दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
सरकार ने पहले ही कर ली थी तैयारी
हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के स्पेशल सेक्रेटरी पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि मानसून शुरू होने से पहले ही सरकार ने हाई-लेवल बैठकें कर सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे। जिला प्रशासन को जरूरत के अनुसार संसाधन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सभी एजेंसियां अलर्ट मोड पर
प्रशासन का कहना है कि आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हैं। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत आपदा प्रबंधन प्रणाली लगातार काम कर रही है। यात्रियों और स्थानीय लोगों से खराब मौसम के दौरान पहाड़ी मार्गों पर यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की गई है।