भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे की तस्वीर जल्द साफ हो सकती है। 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद से ही उनकी टीम के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने देशभर के नेताओं का विस्तृत मूल्यांकन किया है और अब अंतिम चरण की तैयारियां चल रही हैं। माना जा रहा है कि 15 जून के बाद नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की जा सकती है।
युवा नेतृत्व को मिल सकता है बड़ा मौका
सूत्रों के अनुसार, नई टीम के गठन में 50 वर्ष से कम आयु वाले नेताओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों से संभावित चेहरों की सूची तैयार कर वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया है। संगठन के भीतर युवा ऊर्जा और नए नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत कई नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। भाजपा आने वाले चुनावी वर्षों को ध्यान में रखते हुए संगठन को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
बीजेपी संविधान में तय हैं पदाधिकारियों के नियम
भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहायता के लिए विभिन्न पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। पार्टी में अधिकतम 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 9 राष्ट्रीय महामंत्री और 15 राष्ट्रीय मंत्री नियुक्त किए जा सकते हैं। इसके अलावा एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष भी होता है। संगठनात्मक ढांचे को संतुलित और समावेशी बनाने के लिए पार्टी संविधान में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनका पालन नई नियुक्तियों में भी किया जाएगा।
महिलाओं और सामाजिक वर्गों को मिलेगा प्रतिनिधित्व
भाजपा ने संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए हैं। इसका अर्थ है कि कुल 38 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में कम से कम 13 महिलाएं शामिल होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों से न्यूनतम तीन-तीन पदाधिकारियों की उपस्थिति भी जरूरी है। माना जा रहा है कि नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
पार्लियामेंट्री बोर्ड के पुनर्गठन पर भी नजर
राष्ट्रीय पदाधिकारियों की घोषणा के साथ भाजपा की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड का पुनर्गठन भी किया जा सकता है। यह बोर्ड पार्टी की रणनीतिक और राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में बोर्ड में 12 सदस्य हैं, जबकि संविधान के अनुसार इसमें अधिकतम 11 सदस्य होने चाहिए। ऐसे में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए इसमें बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
केंद्रीय चुनाव समिति का भी होगा गठन
पार्लियामेंट्री बोर्ड के साथ-साथ केंद्रीय चुनाव समिति का गठन भी किया जाएगा। यह समिति विभिन्न चुनावों में उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसमें पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य शामिल होते हैं, जबकि कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी सदस्य बनाया जाता है। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए इस समिति का गठन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दिखेगा संगठन का व्यापक स्वरूप
नितिन नवीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन करेंगे, जिसे पार्टी की मुख्य कार्यकारी संस्था माना जाता है। इसमें अध्यक्ष सहित अधिकतम 120 सदस्य हो सकते हैं। संविधान के अनुसार इनमें कम से कम 40 महिलाएं और 12 सदस्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों से होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष विशेष आमंत्रित और स्थायी आमंत्रित सदस्यों को भी मनोनीत कर सकते हैं। नई कार्यकारिणी भाजपा के भविष्य के राजनीतिक और संगठनात्मक एजेंडे की दिशा तय करेगी।
राष्ट्रीय परिषद के जरिए मजबूत होगा संगठनात्मक नेटवर्क
भाजपा की राष्ट्रीय परिषद भी नए संगठनात्मक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इसमें राज्य परिषदों द्वारा निर्वाचित सदस्य, संसदीय दल के प्रतिनिधि, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष, विधानमंडल दलों के नेता, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष शामिल होते हैं। इसके माध्यम से पार्टी जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठनात्मक समन्वय को मजबूत बनाने का प्रयास करती है।