नई दिल्ली: भारत में महिलाओं की डिजिटल पहुंच और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत चार वर्षों में लगभग दोगुना होकर 33.3 प्रतिशत से बढ़कर 64.3 प्रतिशत हो गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिलाओं की शिक्षा, स्कूलों में लड़कियों की उपस्थिति और प्री-स्कूल शिक्षा तक बच्चों की पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
डिजिटल पहुंच में दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी
NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-21 के दौरान जहां केवल 33.3 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती थीं, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत पहुंच गया। पुरुषों में भी इंटरनेट उपयोग बढ़ा है और यह 51.2 प्रतिशत से बढ़कर 80.5 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने महिलाओं को तकनीक से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बड़ा अंतर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डिजिटल पहुंच के मामले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच अब भी बड़ा अंतर मौजूद है। शहरी क्षेत्रों में 77.3 प्रतिशत महिलाओं ने इंटरनेट उपयोग की जानकारी दी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 58.6 प्रतिशत रहा। मोबाइल फोन की उपलब्धता में भी यही अंतर देखने को मिला। राष्ट्रीय स्तर पर 63.6 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना मोबाइल फोन है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 57.4 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 77.6 प्रतिशत दर्ज किया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में भी दिखा सुधार
सर्वेक्षण के मुताबिक 6 वर्ष और उससे अधिक आयु की लड़कियों की स्कूल उपस्थिति दर 71.8 प्रतिशत से बढ़कर 73.7 प्रतिशत हो गई है। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं का प्रतिशत भी बढ़ा है, जिन्होंने 10 या उससे अधिक वर्षों तक स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। यह आंकड़ा 41 प्रतिशत से बढ़कर 46.4 प्रतिशत तक पहुंच गया। पुरुषों में भी यह अनुपात 50.2 प्रतिशत से बढ़कर 54.6 प्रतिशत हो गया है।
प्री-स्कूल में बच्चों की भागीदारी बढ़ी
दो से चार वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में प्री-स्कूल शिक्षा की पहुंच में भी सुधार दर्ज किया गया है। प्री-स्कूल में उपस्थिति 40.1 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गई है। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 46 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसे आंगनवाड़ी और प्रारंभिक शिक्षा कार्यक्रमों की बढ़ती पहुंच का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
शिक्षा नीति के सामने नई चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश तेजी से डिजिटल रूप से आगे बढ़ रहा है, लेकिन डिवाइस, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता तक समान पहुंच सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन शिक्षा, स्कॉलरशिप वितरण और डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए सरकारों को ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल अंतर कम करने पर विशेष ध्यान देना होगा।
जनसंख्या संरचना में भी बदलाव के संकेत
NFHS-6 के नतीजों में जनसंख्या संरचना में बदलाव के संकेत भी मिले हैं। 15 वर्ष से कम आयु की आबादी का हिस्सा 26.5 प्रतिशत से घटकर 25.5 प्रतिशत हो गया है, जबकि पांच वर्ष से कम आयु की आबादी 8.2 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसका असर स्कूलों में दाखिले, शिक्षकों की मांग और शिक्षा के बुनियादी ढांचे की योजना पर पड़ सकता है।