गणेश चतुर्थी से पहले शुक्रवार शाम मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा की प्रतिमा का पहला दर्शन कराया गया। प्रतिमा के अनावरण के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। लालबागचा राजा मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित गणेश मंडलों में शामिल हैं और हर वर्ष देश-विदेश से लाखों भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गणेशोत्सव शुरू होने से पहले प्रतिमा की पहली झलक सामने आना श्रद्धालुओं के लिए खास धार्मिक और भावनात्मक अवसर माना जाता है।
सिंहासन पर विराजमान गणपति बप्पा का मनमोहक स्वरूप
इस वर्ष लालबागचा राजा की भव्य प्रतिमा सिंहासन पर विराजमान दिखाई दे रही है। गणपति का स्वरूप शांत, सौम्य और करुणामय भाव लिए हुए है, जो श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। प्रतिमा की सजावट और कलात्मक बारीकियों में पारंपरिक शिल्प के साथ भव्यता का भी समावेश दिखाई देता है। पहली झलक सामने आने के बाद भक्तों ने इसे आस्था और कला का अद्भुत संगम बताया।
1934 से मुंबई की आस्था का प्रमुख केंद्र
लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल का इतिहास करीब 9 दशक पुराना है। इसकी स्थापना 1934 में लालबाग क्षेत्र की पुटलाबाई चाल में हुई थी। तब से यह गणेशोत्सव मुंबई के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। समय के साथ लालबागचा राजा की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि यहां होने वाले दर्शन को मुंबई के सबसे बड़े सार्वजनिक गणेशोत्सव आयोजनों में गिना जाने लगा।
कांबली परिवार निभा रहा प्रतिमा की जिम्मेदारी
लालबागचा राजा की प्रतिमा से कांबली परिवार का भी लंबे समय से जुड़ाव रहा है। परिवार कई दशकों से प्रतिमा के निर्माण और देखरेख की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। प्रतिमा की बनावट, चेहरे के भाव और सज्जा में हर वर्ष विशेष बारीकी पर काम किया जाता है। यही पारंपरिक शिल्प कौशल लालबागचा राजा को अन्य गणेश प्रतिमाओं से अलग पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
14 सितंबर से शुरू होगा गणेशोत्सव
इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर से शुरू होगा। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी से शुरू होने वाला यह उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है। महाराष्ट्र में इसे विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घरों और सार्वजनिक मंडलों में भगवान गणेश की स्थापना की जाती है तथा पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
मुंबई में गणपति उत्सव की अलग ही रौनक
गणेश चतुर्थी के दौरान मुंबई का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में भव्य पंडाल सजाए जाते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लालबागचा राजा के दर्शन के लिए विशेष रूप से लंबी कतारें लगती हैं। भक्त गणपति से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं तथा कई लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के बाद यहां दर्शन के लिए भी पहुंचते हैं।
आस्था, कला और मुंबई की पहचान का प्रतीक
लालबागचा राजा की लोकप्रियता केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह मुंबई की सामूहिक चेतना, सामाजिक एकजुटता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक बन चुका है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी इस आयोजन की व्यापकता को दर्शाती है। प्रतिमा की पहली झलक सामने आने के साथ ही गणेशोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है और अब भक्तों को गणपति बप्पा के भव्य दर्शन का इंतजार है।