सोशल मीडिया कंपनी Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के सामने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कमियों को लेकर माफी मांगी है। जुकरबर्ग ने सरकार के सामने कंपनी की ओर से हुई गलतियों पर खेद जताया है।
यह मामला उस समय सामने आया जब भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और खतरनाक डिजिटल कंटेंट को लेकर सख्त रुख अपनाया। सरकार ने Meta से बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट, फर्जी वीडियो और गलत सूचना फैलाने वाली सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की थी।
संसदीय समिति ने दिया था तीन दिन का अल्टीमेटम
मामले को लेकर संसदीय समिति ने Meta को तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने के निर्देश दिए थे। समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि कंपनी संतोषजनक जवाब नहीं देती है तो भारत में उसे मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और कुछ विशेष छूट की समीक्षा की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की निगरानी बेहतर तरीके से करें और उपयोगकर्ताओं, खासकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
IT मंत्रालय और Meta अधिकारियों के बीच चल रही बैठक
इस पूरे विवाद को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) और Meta के अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है। Meta की ग्लोबल टीम के अधिकारियों को दिल्ली बुलाया गया है, जहां सरकार के साथ दो दिन की बैठक आयोजित की गई।इन बैठकों में प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉनिटरिंग सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डीपफेक पहचान तकनीक और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रक्रिया पर चर्चा की जा रही है।
पीएम मोदी का वीडियो हटाने को लेकर भी नाराज थी सरकार
Meta को लेकर सरकार की नाराजगी का एक कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो भी था। बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 23 जुलाई को अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक जैसी समस्याओं पर बात की थी।
वीडियो में उन्होंने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की जरूरत बताई थी। लेकिन कुछ समय के लिए यह वीडियो फेसबुक से हट गया था। बाद में Meta ने इसे दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिया।इस घटना के बाद सरकार ने Meta से कंटेंट हटाने और बहाली की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।
डीपफेक और ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
पिछले कुछ समय में डीपफेक वीडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए फर्जी कंटेंट का खतरा तेजी से बढ़ा है। ऐसे कंटेंट का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, लोगों की छवि खराब करने और धोखाधड़ी जैसे मामलों में किया जा सकता है।
सरकार लगातार सोशल मीडिया कंपनियों से ऐसी तकनीक विकसित करने की मांग कर रही है, जिससे फर्जी और आपत्तिजनक सामग्री की पहचान जल्द हो सके और उसे समय रहते हटाया जा सके।
Meta को भारत के नियमों का करना होगा पालन
भारत सरकार का कहना है कि देश में काम करने वाली सभी सोशल मीडिया कंपनियों को भारतीय कानूनों और डिजिटल नियमों का पालन करना होगा। कंपनियों को उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, शिकायतों के समाधान और आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी।
Meta की ओर से माफी और सरकार के साथ बातचीत को इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। अब आगे यह देखना होगा कि कंपनी कंटेंट मॉडरेशन और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कौन से नए कदम उठाती है।