देश में डिजिटल भुगतान को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आम ग्राहकों पर UPI लेनदेन का कोई अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को संचालित करने और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत जरूर होती है, लेकिन इसका बोझ सीधे आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए। बुधवार को मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
संजय मल्होत्रा ने कहा कि किसी भी डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने के लिए मजबूत तकनीकी ढांचे की आवश्यकता होती है और उसकी एक लागत होती है। हालांकि उन्होंने दोहराया कि इसका मतलब यह नहीं है कि आम UPI उपयोगकर्ताओं से शुल्क वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में जो भी निर्णय होगा, वह सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
क्या ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा MDR?
हाल के दिनों में ऐसी चर्चा रही है कि सरकार ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का विकल्प तैयार कर सकती है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार अभी ऐसा कोई फैसला लागू नहीं किया गया है। प्रस्ताव केवल सरकार को भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर शुल्क तय करने का कानूनी अधिकार देने से जुड़ा है।
आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यदि भविष्य में कोई व्यवस्था लागू भी होती है तो उसका उद्देश्य आम ग्राहकों से शुल्क लेना नहीं होगा। अधिकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की खरीदारी—जैसे दूध, सब्जी, किराना और अन्य सामान्य भुगतान—पर किसी तरह का MDR लागू करने की कोई योजना नहीं है। अनुमान है कि देश के 90 प्रतिशत से अधिक UPI लेनदेन पहले की तरह निशुल्क रहेंगे।
सरकार कानून में क्या बदलाव करना चाहती है?
वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा कानून में मौजूद "जीरो चार्ज" की बाध्यता को हटाकर सरकार को भविष्य में अधिसूचना के जरिए यह तय करने की छूट मिल सकती है कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लागू होगा और किन्हें इससे छूट मिलेगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग जाएगा, बल्कि यह केवल भविष्य के लिए नीति संबंधी विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
वर्तमान व्यवस्था के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड के जरिए किए जाने वाले अधिकांश भुगतान पर कोई MDR नहीं लिया जाता। दूसरी ओर, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से किए गए कई व्यापारिक भुगतान पर MDR लागू होता है, हालांकि अधिकांश व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं डालते।
फिलहाल UPI यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पहले की तरह निशुल्क रहेगा। भविष्य में यदि कोई बदलाव किया जाता है तो उसके लिए अलग से सरकारी अधिसूचना जारी की जाएगी और उसके बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी।
Key Highlights
- RBI गवर्नर ने कहा- UPI इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत जरूरी, लेकिन बोझ आम ग्राहकों पर नहीं।
- ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर फिलहाल कोई शुल्क लागू नहीं।
- सरकार केवल भविष्य के लिए कानूनी प्रावधान तैयार कर रही है।
- 90% से अधिक रोजमर्रा के UPI भुगतान निशुल्क रहने की संभावना।
- पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव।