नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। इनमें सबसे चर्चित विषय राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम यानी NSAP के नाम और उसकी उप-योजनाओं में बदलाव रहा। सरकार ने इस फ्लैगशिप कार्यक्रम को अगले पांच साल यानी 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से देश के करोड़ों जरूरतमंद नागरिकों को निरंतर सहायता मिलती रहेगी। कैबिनेट ने सामाजिक सुरक्षा के दायरे को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। इस पूरे प्रक्रिया में योजनाओं के
नामकरण को लेकर स्पष्ट दिशा अपनाई गई।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम परिवर्तन
कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया है। यह बदलाव सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को वर्तमान नेतृत्व के नाम से जोड़ने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। नई नामकरण व्यवस्था के तहत योजना की पहचान को और स्पष्ट बनाने का प्रयास किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे लाभार्थियों में योजना की पहुंच और जागरूकता बढ़ेगी। नाम परिवर्तन के बावजूद योजना के मूल उद्देश्य और लाभ वितरण की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही योजनाओं के पुनर्गठन का हिस्सा है।
तीन उप-योजनाओं से नाम हटाया जाना
इस व्यापक बदलाव के तहत तीन प्रमुख उप-योजनाओं से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम हटा दिया गया है। इन उप-योजनाओं में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांगजन पेंशन शामिल हैं। नाम हटाए जाने के बाद अब ये योजनाएं नई पहचान के साथ संचालित होंगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि लाभ वितरण की प्रक्रिया और पात्रता मानदंड पूर्ववत रहेंगे। इस कदम को योजनाओं के आधुनिकीकरण और एकरूपता लाने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे पहले भी कई अन्य योजनाओं के नाम में बदलाव किए जा चुके हैं।
योजना का बजट और लाभार्थियों की संख्या
प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के लिए सरकार ने 53428 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय परिव्यय तय किया है। इस व्यापक सामाजिक सुरक्षा नेट के जरिए देश के करीब 3.2 करोड़ जरूरतमंद और कमजोर वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें मुख्य रूप से बुजुर्ग नागरिक, विधवा महिलाएं और दिव्यांगजन शामिल हैं। योजना का उद्देश्य इन वर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। इतने बड़े बजट प्रावधान से यह सुनिश्चित होगा कि सहायता राशि समय पर और नियमित रूप से पहुंचे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के पात्र लाभार्थी इस योजना का हिस्सा बन सकेंगे।
दिव्यांगजन पेंशन में बड़े बदलाव
इस पुनरुत्थान प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दिव्यांगजन पेंशन को लेकर किए गए हैं। जन्म से लेकर 79 वर्ष की आयु तक के दिव्यांगों के लिए मासिक सहायता को 300 रुपये से बढ़ाकर 375 रुपये कर दिया गया है। 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग दिव्यांगों के लिए यह राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये प्रति माह कर दी गई है। इसके अलावा बेंचमार्क विकलांगता की पात्रता सीमा को 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इन बदलावों से अधिक संख्या में दिव्यांगजन योजना का लाभ उठा सकेंगे। सहायता राशि में वृद्धि से उनके दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कानूनी अनुरूपता और नए लाभार्थियों का विस्तार
ये संशोधन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुरूप किए गए हैं। इस कानून के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि दिव्यांगों को मिलने वाली सहायता अन्य श्रेणियों की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए। इस प्रावधान का पालन करते हुए सरकार ने राशि में वृद्धि की है। इन बदलावों से देश के 27.48 लाख से अधिक नए लाभार्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। पात्रता सीमा में कमी आने से पहले वंचित रहे कई लोग अब योजना के दायरे में आ सकेंगे। कुल मिलाकर यह निर्णय सामाजिक सुरक्षा को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।