नई दिल्ली. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस वर्ष लगभग पूरे देश को सामान्य समय के आसपास कवर कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां अचानक कमजोर पड़ गई हैं। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से पर वर्षा वाले बादलों की कमी दिखाई दी है, जिसके कारण उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में उमस बढ़ गई है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे मॉनसून के सामान्य चक्र का एक अस्थायी चरण मान रहे हैं, जिसे ‘ब्रेक मॉनसून’ कहा जाता है।
पश्चिमी प्रशांत महासागर का चक्रवात बना बड़ी वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत से हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी प्रशांत महासागर में विकसित एक शक्तिशाली चक्रवाती प्रणाली ने मॉनसून की रफ्तार को प्रभावित किया है। इस मौसम प्रणाली ने नमी से भरपूर हवाओं और वायुमंडलीय ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय मॉनसून ट्रफ कमजोर पड़ गई है और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी देश के भीतरी हिस्सों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रही है। इसी कारण अनेक राज्यों में बारिश की गतिविधियों में अस्थायी कमी दर्ज की जा रही है।
इस वर्ष मॉनसून का सफर रहा उतार-चढ़ाव भरा
इस बार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने सामान्य समय से लगभग एक दिन की देरी से पूरे देश को कवर किया। हालांकि शुरुआती चरण में जून के अंतिम सप्ताह तक वर्षा सामान्य से काफी कम रही थी, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसके बाद जुलाई के पहले सप्ताह में कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई और वर्षा की कमी काफी हद तक कम हो गई। लेकिन अब वैश्विक मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मॉनसून एक बार फिर कमजोर दौर में प्रवेश कर गया है।
अल-नीनो की आशंका भी बढ़ा रही चिंता
मौसम विशेषज्ञों की निगाहें प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल-नीनो परिस्थितियों पर भी टिकी हैं। यदि अल-नीनो और अधिक मजबूत होता है तो इसका असर भारत में वर्षा की मात्रा और वितरण दोनों पर पड़ सकता है। कमजोर मॉनसून के दौरान तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है, जिससे बिजली की मांग बढ़ने, जलाशयों में पानी की उपलब्धता घटने और खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ने जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक लगातार वैश्विक महासागरीय गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने दी राहत की उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल यह स्थिति स्थायी नहीं है और इसे मॉनसून के ‘ब्रेक फेज’ के रूप में देखा जाना चाहिए। जैसे ही पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय चक्रवाती प्रणाली कमजोर पड़ेगी और मॉनसून ट्रफ दोबारा सक्रिय होगी, देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां फिर से तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मॉनसून दोबारा सक्रिय होकर कई राज्यों में अच्छी बारिश ला सकता है, जिससे खेती, जलस्रोतों और मौसम की स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा।