नई दिल्ली. देशभर में अगस्त की शुरुआत मानसून की तीव्र गतिविधियों के साथ हुई है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर भारत, पूर्वी भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर के अनेक हिस्सों में अगले चौबीस घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, असम और उत्तराखंड सहित उन्नीस राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विभिन्न स्तर के मौसम अलर्ट जारी किए गए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार मिल रही नमी तथा सक्रिय मानसूनी द्रोणिका के कारण वर्षा की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। ऐसे में नागरिकों, किसानों, पर्वतीय क्षेत्रों के यात्रियों तथा मछुआरों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में सामान्य से अधिक वर्षा के संकेत
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून की सक्रियता और बढ़ने के संकेत हैं। इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में नमी की मात्रा अधिक है, जिससे लगातार बादल बनने और वर्षा होने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरण की वर्षा खरीफ फसलों के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव, फसल क्षति तथा परिवहन बाधित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी जहां पिछले दिनों भी भारी वर्षा दर्ज की गई थी और भूमि पहले से संतृप्त है।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश में तेज बारिश के साथ आंधी की संभावना
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पूरे दिन बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी वर्षा तथा लगभग पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। लगातार वर्षा के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। वहीं उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य भागों के साथ-साथ पूर्वी जिलों में भी वर्षा की तीव्रता बढ़ने की संभावना है। सहारनपुर, मेरठ, आगरा, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी सहित अनेक जिलों में तेज हवाओं और भारी वर्षा को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली गिरने की घटनाओं की आशंका को देखते हुए खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।
बिहार, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में बढ़ी चिंता
बिहार के अनेक जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां तेज हवाओं के साथ अच्छी वर्षा होने का अनुमान है। दूसरी ओर असम, अरुणाचल प्रदेश तथा पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में पहले से बनी बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि तथा निचले इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को राहत एवं बचाव दल तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा के साथ भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वालों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी है।
गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य भारत में भी तेज बरसात का दौर
पश्चिम भारत में गुजरात और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। दक्षिण गुजरात, कोंकण क्षेत्र तथा मध्य महाराष्ट्र में कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा दर्ज हो सकती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में भी लगातार वर्षा का क्रम जारी रहने के आसार हैं। मौसम विभाग का कहना है कि इन क्षेत्रों में वर्षा के कारण तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट देखी जा सकती है, जिससे लोगों को उमस से राहत मिलेगी, लेकिन कई स्थानों पर स्थानीय बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
किसानों, मछुआरों और आम नागरिकों के लिए सतर्कता सबसे जरूरी
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए सिंचाई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों की योजना बनाएं। जिन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की संभावना है, वहां खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने की आवश्यकता होगी। समुद्री तटों पर रहने वाले मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि तेज हवाओं और ऊंची लहरों का खतरा बना हुआ है। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों, तेज बहाव वाले नालों तथा बिजली गिरने की आशंका वाले खुले स्थानों से दूरी बनाए रखें। प्रशासन ने आपात स्थिति में स्थानीय नियंत्रण कक्ष और राहत एजेंसियों के संपर्क में रहने की भी सलाह दी है।
देश में मानसून का यह सक्रिय दौर आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जहां यह वर्षा जल स्रोतों और कृषि के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, वहीं संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता, समय पर चेतावनी और प्रभावी आपदा प्रबंधन ही संभावित नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम होगा।