लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक तबाही मचाई है। अनेक स्थानों पर भूस्खलन होने से प्रमुख संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे चारधाम यात्रा भी प्रभावित हुई है। राज्य में 107 से अधिक सड़कें मलबा और चट्टानें गिरने के कारण बंद हैं। नदियों और गदेरों का जलस्तर लगातार बढ़ने से मैदानी क्षेत्रों में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिसके मद्देनजर देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चंपावत और बागेश्वर में कक्षा 12 तक के सभी विद्यालयों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से बढ़ीं मुश्किलें
हिमाचल प्रदेश में भी मानसून का प्रकोप लगातार जारी है। किन्नौर जिले में अचानक आई बाढ़ ने लगभग सौ फुट लंबे लोहे के पुल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार लगातार वर्षा और भूस्खलन के कारण 75 सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानें गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे राहत एवं बचाव कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही वर्षा से आने वाले दिनों में भूस्खलन का खतरा और बढ़ सकता है।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में बारिश बनी जानलेवा
उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और जलभराव से जुड़े हादसों में कम से कम 19 लोगों की मृत्यु की सूचना है। बुलंदशहर में मकान की दीवार गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई, जबकि गाजियाबाद में जलभराव और नाले में गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में वज्रपात की घटनाओं ने भी कई परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी लगातार वर्षा के कारण जलभराव और यातायात अव्यवस्था ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। वहीं राजस्थान में धौलपुर और अजमेर में मकान गिरने की घटनाओं में कई लोग मलबे में दब गए तथा लगातार बारिश के कारण छह रेलगाड़ियों का संचालन निरस्त करना पड़ा, जबकि अनेक रेल सेवाएं विलंब से चल रही हैं।
गुजरात में बाढ़ जैसे हालात, हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
गुजरात के कई जिलों में लगातार हो रही वर्षा ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सूरत सहित अनेक क्षेत्रों में बारिश से जुड़े हादसों में नौ लोगों की मृत्यु की सूचना है। निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने के बाद प्रशासन ने लगभग 3,900 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। राहत एवं बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्षा का यही क्रम जारी रहा तो कुछ क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मध्य प्रदेश में फिलहाल राहत, लेकिन सतर्कता बरकरार
जहां देश के अनेक राज्यों में मानसून पूरी ताकत से सक्रिय है, वहीं मध्य प्रदेश में आगामी तीन से चार दिनों के दौरान वर्षा की गतिविधियों में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसूनी द्रोणिका उत्तर प्रदेश की ओर खिसकने के कारण प्रदेश में भारी वर्षा का दौर कमजोर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने फिलहाल केवल पन्ना और सतना जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जबकि राजधानी भोपाल सहित अधिकांश जिलों में हल्की वर्षा और गरज-चमक की संभावना व्यक्त की गई है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि मानसून अभी सक्रिय बना हुआ है और परिस्थितियों में तेजी से बदलाव संभव है, इसलिए नागरिकों को मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
बदलते मौसम के बीच आपदा प्रबंधन की परीक्षा
देशभर में मानसून की तीव्रता ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि चरम मौसमी घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं। लगातार हो रही भारी वर्षा ने परिवहन व्यवस्था, कृषि, पर्यटन और दैनिक जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए राज्यों को दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन रणनीति, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की वैज्ञानिक निगरानी तथा समयबद्ध चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करना होगा। तत्काल राहत कार्यों के साथ-साथ भविष्य की तैयारियां ही ऐसे प्राकृतिक संकटों से होने वाले नुकसान को प्रभावी रूप से कम कर सकती हैं।