Gujarat: सिनेमा का असर सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रहता। फिल्मी सितारों की बोली, पहनावा और उनके द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों का प्रभाव बड़ी संख्या में दर्शकों पर पड़ता है। खासकर बच्चे और युवा अपने पसंदीदा कलाकारों से काफी प्रभावित होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फिल्म कलाकारों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की। 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि लोकप्रिय फिल्म कलाकारों के पास देशवासियों, खासकर युवाओं को प्रभावित करने की बड़ी क्षमता होती है। उन्होंने कलाकारों से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक चीजों के प्रचार से बचने पर जोर दिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने क्यों की यह अपील?
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने फिल्म कलाकारों की लोकप्रियता और उनके प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब सफल कलाकार स्वस्थ जीवनशैली के फायदे बताते हैं तो बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उससे प्रेरणा लेते हैं। इसी तरह किसी ऐसी चीज का प्रचार, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है, उसका भी दर्शकों पर प्रभाव पड़ सकता है। राष्ट्रपति ने कलाकारों से किसी उत्पाद का विज्ञापन करने से पहले उसके संभावित नुकसान को समझने की अपील की। उनके संदेश का केंद्र यही था कि लोकप्रियता के साथ कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।
‘सच्चा स्टार वही, जो रोशनी फैलाए’
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संदेश को एक प्रभावी विचार के साथ समाप्त किया। उन्होंने कहा कि सच्चा स्टार वही है जो रोशनी फैलाता है, अंधेरा नहीं। उनकी इस अपील में फिल्म कलाकारों से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और लोगों को नुकसानदायक चीजों से बचाने में सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश था। राष्ट्रपति का यह संबोधन खास तौर पर युवाओं और बच्चों पर सिनेमा के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कलाकारों की भूमिका पर केंद्रित रहा।
फिल्म अवॉर्ड जूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने फिल्म पुरस्कारों की जूरी में महिलाओं की अधिक भागीदारी की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में महिलाओं का नजरिया शामिल होना जरूरी है। राष्ट्रपति ने यह बात ऐसे समय कही जब समारोह में सम्मानित होने वाले कलाकारों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। उनके अनुसार, जिस तरह फिल्म और रचनात्मक क्षेत्र में महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं, उसी तरह निर्णय लेने वाली संस्थाओं और जूरी में भी उनकी पर्याप्त भागीदारी होनी चाहिए।
क्रिएटिव इकॉनमी में हर स्तर के लोगों का ध्यान जरूरी
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में क्रिएटिव इकॉनमी से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि रचनात्मक क्षेत्र में ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को उन लोगों का भी ध्यान रखना चाहिए, जो इस पूरी व्यवस्था में निचले स्तर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने मजदूरों, छोटे कलाकारों और संघर्ष कर रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनका संदेश था कि फिल्म और रचनात्मक उद्योग की सफलता में पर्दे के पीछे और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों का भी योगदान होता है।
सिनेमा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु के संबोधन में फिल्म उद्योग के लिए तीन प्रमुख संदेश सामने आए—स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और क्रिएटिव इंडस्ट्री से जुड़े हर स्तर के लोगों के प्रति संवेदनशील रहना। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में दिया गया यह संदेश सिनेमा की लोकप्रियता और उससे जुड़ी सामाजिक जिम्मेदारी पर केंद्रित रहा।